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इतिहास

अगर ये 5 युद्ध नहीं हुए होते तो आज भी भारत सोने की चिड़िया ही होता, हर घर में होता सोना ही सोना

भारत सोने की चिड़िया

भारत सोने की चिड़िया– युद्ध और सत्ता दोनों का एक दूसरे से बहुत गहरा रिश्ता है. पुराने समय में युद्ध सत्ता का हिस्सा होता था. जिसके पास शक्ति है वह किसी भी दुसरे राज्य पर युद्ध करके उसे जीत सकता था. आज की तरह सत्ता हस्तांतरण चुनावों पर नहीं बल्कि शक्ति के बल पर हुआ करती थी. जो योद्धा जीतता था वहीं वहां का राजा होता था. भारत की धरती भी ऐसे अनेक युद्धों का गवाह है.

लेकिन इस धरती पर हुए पांच ऐसे युद्ध रहे जिसने भारत का पूरा इतिहास ही पलट कर रख दिया. अगर ये युद्ध नहीं हुए होते तो हमारा देश आज से बहुत अलग और सर्वश्रेष्ठ होता. भारत सोने की चिड़िया-

भारत सोने की चिड़िया

तराइन का दूसरा युद्ध

1192 एडी में मौहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहना के बीच यह युद्ध हुआ. गौरी ने वैसे तो कई बार दिल्ली की सल्तनत पर आक्रमण किया लेकिन हर बार उसे हार का सामना करना पड़ा लेकिन इस बार उसने पृथ्वीराज को हरा दिया और दिल्ली पर अपना कब्जा कर लिया. भारतीय इतिहास में यह मुस्लिम शासक की शुरुआत थी.

भारत सोने की चिड़िया

पानीपत का पहला युद्ध-

1526 में पानीपत की पहली लड़ाई इब्राहिम लोदी और बाबर के बीच हुआ. मेवाड़े के राजा राणा सांगा, लोदी को हटाकर खुद दिल्ली की गद्दी पर बैठना चाहते थे इसलिए उन्होंने बाबर को दिल्ली पर हमला करने का न्योता दिया. बाबर ने दिल्ली पर आक्रमण तो सिर्फ धन के कारण किया लेकिन बाद में उसकी नियत बदल गई और वह दिल्ली की सत्ता पर काबिज हो गया. बाबर ने मुगल साम्राज्य की नींव रखी जिसके वंश ने तीन सौ साल तक यहां राज किया.

भारत सोने की चिड़िया

प्लासी का युद्ध-

1757 को हुए इस युद्ध ने अंग्रेजों को व्यापारी से शासक में बदल दिया. यह युद्ध सिराजुद्दौला और ब्रिटिश इस्ट इंडिया कम्पनी में हुआ. इस युद्ध से अंग्रेजों ने भारतीयों को लालच देकर सत्ता हड़पने का काम शुरु किया. इस युद्ध में सिराजुद्दौला की हार हुई. इसके बाद से ही भारत में अंग्रेजों ने हस्तक्षेप करना शुरु कर दिया.

भारत सोने की चिड़िया

पानीपत का तीसरा युद्ध-

1761 में पानीपत का तीसरा युद्ध मराठा और अहमद शाह के बीच हुआ. इस युद्ध ने देश में लोगों को बांटने का काम किया. इसमें मुराठा और मुगल आपस में लड़े जिसका फायदा अंग्रेजों ने उठाया.

भारत सोने की चिड़िया

 

बक्सर का युद्ध –

1764 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा के शासक एक साथ मिलकर लड़े लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी. अंग्रेज इतने शक्तिशाली हो चुके थे कि उन्हें हरा पाना अब आसान नहीं था.

 

भारतीय इतिहास में ये वो युद्ध है जो निर्णायक सिद्ध हुए. इन युद्धों में जितने वालों ने भारतीय इतिहास को एक नया अध्याय दिया. अगर ये युद्ध नहीं हुए होते तो भारत आज भी अपने उसी विशालकाय रुप में होता जैसा पहले हुआ करता था लेकिन अफसोस यह है कि इनमें से ज्यादातर युद्धों में अपनों ने ही दगा दिया.

 

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