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इतिहास

जरुर पढ़िए-12 साल के उस बहादुर बच्चे की कहानी, जिससे थर-थर कांपते थे अंग्रेज अफसर

भगत सिंह का बचपन

(फीचर तस्वीर में जो स्थल है वह भगत सिंह का पाकिस्तान में स्थित घर है) 16वीं सताब्दी में ईस्ट इंडिया कम्पनी को अपने देश में व्यापार करने की इजाजत देना हमें इतना महंगा पड़ा था कि हमने 200 सालों तक इसकी सजा भुगतने को मिली. हमें आजादी यूं ही नहीं मिली. इस आजादी के लिए बहुत से वीरों से समय-समय पर अपने प्राणों की आहूती दी है.

1857 की क्रांति के वक्त ही हम आजाद हो जाते लेकिन तब हम विफल हो गए लेकिन प्रयास लगातार जारी रहा. 200 साल के इतिहास में अंग्रेजों ने हमेशा ही जुर्म किया लेकिन जलिया वाला बाग हत्याकांड में उन्होंने इंसानियत की सारी हदें पार कर दी थी. भगत सिंह का बचपन-

भगत सिंह का बचपन

भगत सिंह की माँ का एक दुर्लभ चित्र

अंग्रेजी सेना ने 13 अप्रैल 1919 में पांच हजार निहत्थे लोगों पर आँख बंद फायरिंग की थी. तत्कालीन ब्रिग्रेडियर जनरल डायर ने इन मासूम लोगों पर गोली चलाने का हुक्म देकर पूरे देश का खून खौला दिया.

1919 में अंग्रेजी हुकुमतों ने क्रांति पर ब्रेक लगाने के लिए रोलेट एक्ट पारित किया जिसका मतलब है कि वह कभी भी किसी को भी गिरफ्तार कर जेल में डाल सकती है. इस एक्ट के तहत अंग्रेजों ने पंजाब के सत्यपाल और सैफुद्दीन को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था.

इसी के विरोध में बैसाखी वाले दिन पंजाब के लोग जलियावाला बाग में इक्ट्ठा हुए. इसमें बच्चे बूढ़े जवान सभी उम्र के लोग थे. इस बाग में आने के लिए एक ही रास्ता था. जनरल डायर ने अपने 90 सैनिकों के साथ बाग को चारों तरफ से घेर लिया और बिना बताए गोलियों की बौछार करना शुरु कर दिया. कुल 1650 राउंड फायरिंग में एक हजार से ज्यादा निहत्थे लोगों की जान गई.

भगत सिंह का बचपन

 

  • भगत सिंह का बचपन ऐसे बना क्रांतिकारी

एक 12 साल का बच्चा जो स्कूल में पढ़ रहा था जब उसे इसका पता चला तो वह इसे बरदास्त नहीं कर सका. वह तुरंत स्कूल से सीधे 12 मील पैदल चलकर जलियावाला बाग पहुंच गया. जहां उसने जो देखा उसने उसकी जिंदगी ही बदल दी.

हत्याकांड से पहले देश के लिए कुछ कर गुजरने वाला यह बच्चा अभी सोच ही रहा था कि हिंसा और अहिंसा में से किस रास्ते को चुना जाए. उस दौरान वह चाचा की क्रांतिकारी किताबें भी पढ़ रहा था तो दूसरी तरफ गांधी जी के अहिंसा के बारे में सोच रहा था. वह ऐसे दोराहे पर खड़ा था जहां से उसे एक रास्ता चुनना था. यह रास्ता चुनने वाले सच्चा भारतीय कोई और नहीं शहीद भगत सिंह थे.

भगत सिंह का बचपन- ऐसे समय में जलियावाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह को इतना दर्द दिया कि उनसे बिना सोचे ही हिंसक रास्ता चुन लिया. उसने बाग में जो देखा उसे बरदास्त नहीं कर सका. सैकड़ों लोगों की लाशों को देख उसका खून खौल गया. कहते हैं यह वह पहली चिंगारी थी जिसने भगत सिंह के दिल में अंग्रेजों के लिए आग लगा दी थी.  तब इस 12 साल के बच्चे ने यही कसम खाई थी कि अब अंग्रेजों को देश से निकालना नहीं है बल्कि इनको इन्हीं की भाषा में जवाब देना है.

 

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