Connect with us

22 मार्च 1931, भगत सिंह ने साथियों के लिए लिखा था खून से अपने आखरी खत, आइये पढ़ते इस खत को जिसको पढ़कर आप रोने लग जायेंगे

Bhagat Singh Last Letter

Bhagat Singh Last Letter- भगत सिंह, इस क्रांतिकारी को भला कौन नहीं जानता है. आजादी इसकी दुल्हन थी और भगत सिंह इसी आजादी को बस भारत में देखना चाहता था. अगर खुद भगत सिंह चाहता तो उसकी फांसी टाली जा सकती थी लेकिन भगत को ऐसा लगता था कि इस गुलाम देश में अगर वह फांसी को रुकवाते हैं तो उसके बाद उनकी जलाई हुई आजादी की आग बुझ जाएगी. यही कारण है कि आजादी से पहले बलिदान देने वाला यह व्यक्ति भारत के लिए मानव नहीं बल्कि को देवता था. भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907में  पंजाब के बागा चित्र में हुआ था. जो अभी पाकिस्तान में है.

 23 मार्च 1931 में इनको फांसी दी गई थी. जब वह मात्र 30 साल के थे और जवानी में थे तभी इनको फांसी दे दी गयी थी. लेकिन फांसी मिलने से 1 दिन पहले 22 मार्च 1931 में इन्होंने एक खत अपने साथियों के लिए लिखा था. आइए जानते हैं क्या थे भगत सिंह के आखरी शब्द जो उन्होंने अपने साथियों के लिए लिखे थे. Bhagat Singh Last Letter

Bhagat Singh Last Letter

अपने खत में भगत सिंह ने लिखा था-” यह खूबसूरत जिंदगी जीने की इच्छा, मुझमें भी होनी चाहिए. लेकिन मैं ऐसे कैद होकर जीना नहीं चाहता हूँ. आज मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है और क्रांतिकारी और दो आदर्शों ने मुझे इतना ऊंचा कर दिया है कि इसको बरकरार करने के लिए शायद मेरा जीना सही नहीं हो सकता. अगर आज मैं फांसी से बच गया तो मेरी कमजोरियां लोगों के सामने आ जाएगी और क्रांति का प्रतीक धुंधला पड़ जाएगा. जो मैं (भगत सिंह) हरगिज़ नहीं चाहता हूँ.

Bhagat Singh Last Letter

लेकिन आज अगर मैं फांसी में चढ़ता हूं तो हर घर की मां अपने बच्चों को क्रांति वीर भगत के बारे में बताया करेंगी. जिससे देश में होने वाली कुर्बानियां बढ़ जाएगी और आजादी देने वालों की तादाद बढ़ जाएगी. हां एक विचार जो मेरे मन में अक्सर आता है देश और मानवता के लिए मेरे मन में बहुत सी बातें थी, जिसे मैं करना और देखना चाहता था. अगर मैं जीवित रहता तो शायद अपनी ख्वाहिशें पूरी कर पाता लेकिन मेरे मैं आज फांसी से बचने की किसी भी प्रकार की लालसा नहीं है.

Bhagat Singh Last Letter

आज मुझे फांसी चढ़ने के बाद मुझे अपने आप पर बहुत गर्व  होगा. शायद इसके बाद मैं अपने आप को सौभाग्यशाली समझूंगा जो देश के काम आया. अब मुझे बेसब्री से अंतिम घड़ी का इंतजार है. कामना है कि यह जल्दी आएगा”. आपका  साथी भगत सिंह.

Bhagat Singh Last Letter

इस खत्म को लिखने के बाद भगत सिंह को फांसी दे दी गयी थी. भगत सिंह भारत को आजाद कराना चाहता था लेकिन देखिये कि अंग्रेज गये तो भारत अपने ही बिके हुए लोगों के हाथ में आ गया. गरीबी और अत्याचार खत्म नहीं हुए. अमीर और ज्यादा अमीर हुआ और गरीब को मरने के लिए छोड़ दिया गया.

भगत सिंह चाहता तो खुद को वह डॉक्टर, वकील या एक बड़ा नेता बना सकता था लेकिन बंदे की सच्ची कुर्बानी देखो कि हँसते-हँसते फांसी के फंदे को चूम गया. अपने आखरी खत में भगत सिंह यही लिखता है कि मैं अगर फांसी से पीछे हटा तो भारत की जवानी बेकार हो जाएगी.

मैं फांसी चढ़ रहा हूँ क्योकि देश का बच्चा-बच्चा आजादी को समझ सके. भारत माता को गुलामी से बचाया जा सके. लेकिन भगत सिंह हमें दुःख है कि भारत आज भी आजाद नहीं हो पाया है.

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More in