अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा करेगें 40 हजार जवान, देखिये किस तरह से भक्तों को दी जा रही है वीवीआईपी सुरक्षा

Amarnath Yatra

Amarnath Yatra- अमरनाथ गुफा हिंदुओ का एक प्रमुख तीर्थस्थल है, जो भारत के जम्मू कश्मीर मे स्थित है. यह गुफा ज्यादातर समय बर्फ से ढ़की रहती है. माना जाता है कि भगवान शिव यहां हिम शिवलिंग के रूप में मौजूद है. और यहीं पर शिव ने पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था. यहां कि प्रमुख विशेषता बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का बनना है.

Amarnath Yatra

जगह जगह पर आंतकी हमलों को देखते हुए इस बार सुरक्षा एजेंसियो ने श्रृद्धालुओं के लिए 40,000 जवान तैनात किए है. समुंद्रतल से 12,756 फीट की ऊँचाई पर स्थित इस गुफा की यात्रा के दौरान बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पडता है. प्राकृतिक आपदाओं के अलावा हर समय आंतकी हमले का भी डर बना रहता है. बीते साल भी यहाँ यात्रा में भक्तों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था.

Amarnath Yatra

गुफा तक जाने के दो रास्ते – पहलगाम से अमरनाथ

पहलगाम जम्मू से 315 किमी. की दूरी पर है. इससे अमरनाथ का सफऱ केवल 34 किमी का है, जो पैदल तय किया जाता है. यहां से अमरनाथ पहुँचने मे लगभग 5 दिन का वक्त लगता है. समुंद्रतल से 11000 फीट ऊँचा ये रास्ता आसान नही है. पहलगाम से अगला पडाव चंदनबाडी है यहां से पिस्सु घाटी के लिए चढाई शुरू होती है,और 12 किमी. की यात्रा के बाद श्रृद्धालु शेषनाग झील तक पहुँचते है. वारबल, महागुन को पार करते हुए अंतिम पडाव पंचतरणी आता है जिससे अमरनाथ गुफा की दूरी सिर्फ 3 किमी. है.

Amarnath Yatra

बालटाल से अमरनाथ

खतरों से भरा हुआ ये सफर पहले रास्ते के मुकाबले छोटा तो है. लेकिन साल 2017 मे अमरनाथ से आ रही श्रृद्धालुओं की एक बस को आंतकियो मे निशाना बना लिया था, जिसमे 7 श्रृद्धालुओं  की मौत हुई थी और 12 जख्मीं हुए थे. बालटाल से 12 किमी का सफऱ करने के बाद गुफा तक जहुँचा जा सकता है.

Amarnath Yatra

पहले भी यात्रियों पर कईं बार आंतकी हमले हो चुके है. साल 2017 मे आंतकियों ने श्रृद्धालुओं की बस पर हमला किया था और साल 2006 मे बालटाल से आ रही बस पर बम फेंका गया था.

पहले से ही होते आ रहे हमलों को देखते हुए इस बार चाक चौबंद इंतजाम किए गए है जहां रेडफ्रीक्वेंसी वाली गाडियां और ड्रोन के जरिए भी नजर रखी जाएगी. वहीं कमांडो भी रास्तों पर अपनी पैनी नजर रखेगें.

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