मुस्लिम मर्दों ने पत्नी को तलाक देने का नया और सनसनीखेज आईडिया खोजा, पढ़कर आप भी सर पकड़कर बैठ जाओगे

तीन तलाक और मुस्लिम औरतें 

तीन तलाक और मुस्लिम औरतें- भारत सरकार मुस्लिम महिलाओं को उनका हक़ दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है. आज 21 वी सदी में जी रहा भारत कहीं ना कहीं मुस्लिम महिलाओं को उनका हक़ नहीं दिला पा रहा है. यही कारण था कि भारत सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया था.

इस कानून से मुस्लिम मर्द तो इतने नहीं डर रहे हैं जबकि ऐसे मुस्लिम मुल्ला डरे हैं जिनकी रोजी-रोटी ही तलाक जैसे कामों की वजह से चल रही है. सच्चा मुसलमान तो खुद बोल रहा है कि जब आप किसी की जिम्मेदारी  उठा नहीं सकते हैं तो किस अधिकार के साथ आप किसी से शादी करते हैं. 

तीन तलाक और मुस्लिम औरतें 

असल में इस्लाम में तीन शादियाँ तब लिखी हुई हैं जब आप किसी मजबूर और जीवन से हार चुकी महिला का सहारा बनते हैं. लेकिन आज तो तीन तलाक और तीन शादियाँ बस रिवाज सा बन गया है. मर्द तीन बार औरत को तलाक बोल देता है और आसानी से महिला से छुटकारा भी मिल जाता है.

बराबरी का खेल तो तब माना जाए जब महिला को भी तीन बार तलाक बोलकर मर्द से छुटकारा पाने का अधिकार मिल जाये. मुस्लिम महिलायें बेशक सामने आकर यह बात नहीं बोल रही हैं लेकिन सच यही है कि वह खुश हैं कि तीन तलाक पर कानून बना है. अब आपको बीते दिनों का ही एक मामला बताते हैं तो उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में हुआ है- तीन तलाक और मुस्लिम औरतें 

तीन तलाक और मुस्लिम औरतें 
रूबी की असली तस्वीर

सऊदी अरब से ही मैसेज करके दिया तलाक 

उत्तर प्रदेश में रहने वाली एक महिला जिसका नाम रूबी बताया जा रहा है वह अपने मासूम से बच्चे से साथ दर-दर के ठोकरे खा रही है. इस महिला का बोलना है कि उसका पति सऊदी अरब में है और वहीँ से उसने मोबाइल पर इसको तीन बार तलाक बोलकर तलाक दे दिया है.

तीन तलाक और मुस्लिम औरतें 

उसने लिखा है कि रूबी तलाक, तलाक तलाक. अब इस मामले में अभी उत्तर प्रदेश सरकार कुछ खास कर तो नहीं पा रही है क्योकि कानून अभी पूरी तरह से बना नहीं है. लेकिन 4 साल के मासूम से बच्चे के साथ महिला आज सड़क पर आ गयी है.

तीन तलाक और मुस्लिम औरतें 

महिला का आरोप है कि उसका पति उससे दहेज़ में पैसे और गाड़ी मांग रहा था. एक बार रूबी ने बच्चे की फीस देने के लिए पति से पैसे मांगे तो उसने तलाक दे दिया है.

ऐसे में आप दिल पर हाथ रखकर खुद बताइए कि क्या वाकई मुसलिम समाज की महिलाओं को हक़ दिलाने के लिए तीन तलाक के खिलाफ कानून नहीं बना देना चाहिए? आपके जवाब हमें कमेन्ट बॉक्स के जरिये मिल जायेंगे, इसलिए कमेन्ट करना हमें ना भूलें.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*