भारतीय इतिहास का सबसे काला किस्सा- पढ़िए कैसे भारतीय महिलायें अपनी इज्जत बचाने के लिए घूंघट करने पर हुई मजबूर

History veil in India

History veil in India- भारत के इतिहास को उठा के देखे तो आपको वहां पर्दा प्रथा कहीं भी नहीं  मिलेगी. तब के समय में कोई महिला किसी से अपना मुँह न छिपाती थीं. महिलाऐं पूरी तरह स्वतंत्र थीं उन पर कोई रोक-टोक का पहरा नहीं था.

पहले के समय में मुँह को छिपाने को चोरों की फितरत बताया जाता था. लेकिन आज के समय में मुंह को ढ़कना दूसरों के प्रति सम्मान दिखाने का एक अनोखा तरीका है. शायद इसीलिए घर की औरतें घर के बड़ों के सामने अपने मुंह को पर्दे के पीछे रखती हैं.

History veil in India

किसी भी पुराने ग्रंथ, वेद और धर्म शास्त्रों में पर्दे के सिस्टम का कोई जिक्र नहीं पाया जाता था. आम औरतों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं था. यहां तक कि गांवों की स्त्रियों के लिए भी पर्दे का कोई नियम नहीं था.

History veil in India

लेकिन यह पर्दा आज के युग में जरूर देखने को नहीं मिलता. आज हम ज्यादातर महिलाओं को घूघंट की आड़ में देखते हैं. फिर कहां से आई ये घूघंट की आड़ महिलाओं के जिदंगी में?

राजपरिवारों व बड़े घरानों की महिलाओं के लिए पर्दा प्रथा को अपनाने के कुछ सबूत धर्मशास्त्र का इतिहास पुस्तक’ में आगे पेज 337 पर पहली बार देखने को मिले. साथ ही जातक कथाओं की रचनाओ में भी कहीं-कहीं महिलाओं को पर्दे में दिखाया गया है.

History veil in India

अगर मुगलकाल के इतिहास को सही से खंगाला जाये तो दो बातें सामने आती हैं. जो कि कभी पहले न तो हुई और न ही सुनी गई थी. पहली बात उनके आने के बाद समाज में महिलाओं के साथ रेप के मामले सामने आने लगे.

हिंदुओं के धर्मों में औरतों के साथ छल तो देखने को मिलता है, परंतु औरतों के साथ रेप मुगलकाल में पहली बार सुनने को मिला. दूसरी बात पर्दा प्रथा भी मुस्लिम महिलाओं द्वारा ही चलाई गयी थी.

History veil in India

दिन-प्रतिदिन बढ़ते रेपों की वारदातों ने समाज में महिलाओं के लिए असुरक्षा का माहौल बना दिया था. हालांकि, मुस्लिमों की औरतों के लिए तो पर्दा प्रथा पहले से ही थी.

हिंदुओं की महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए और उनको बुरी नजरों से बचाने के लिए हिंदुओं ने भी पर्दा प्रथा को अपनाने का फैसला लिया.

आज भी इस प्रथा को भलिभाँती चलाया जा रहा है, इसका अंदाजा आप अपने घरों की महिलाओं को देखकर भी लगा सकते हैं. (वंशिका सैनी, डेमोक्रेटिक वोइस ऑफ इंडिया)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*