गुजरात का जूनागढ़ इसके कहने पर हुआ था पाकिस्तान में शामिल, कहानी जो आपने आज तक सुनी नहीं होगी

गुजरात का जूनागढ़ पाकिस्तान में शामिल

आने वाले अपने कुछ अगले कुछ लेखों में हम आपको जूनागढ़ की कहानी बताने वाले हैं कि कैसे 15 अगस्त 1947 को जब भारत आजादी का जश्न मना रहा था तो उसके दो दिन बाद ही यह जश्न मातम में बदल गया था. किसी को भी ऐसा अंदाजा नहीं था कि अचानक से गुपचुप तरीके से जूनागढ़ के नवाब मोहम्मद महाबत खान पाकिस्तान के साथ चले जायेंगे.

गुजरात का जूनागढ़ पाकिस्तान में शामिल

इस कहानी को तो सभी ने इतिहास की किताबों में पढ़ा है कि जूनागढ़ पाकिस्तान में शामिल हो गया था और पाक भारत के इस हिस्से पर कब्जा करने के लिए भी निकल लिया था. नवाब साहब को मालूम था कि जूनागढ़ की जनता भारत के साथ रहना चाहती है लेकिन नवाब साहब ने अचानक से ही पाकिस्तान भाग जाने का फैसला किया और अपनी रियासत को पाकिस्तान के हवाले कर दिया था. आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर क्यों नवाब महाबत खान ने भारत के साथ गद्दारी कर दी थी-  गुजरात का जूनागढ़ पाकिस्तान में शामिल

गुजरात का जूनागढ़ पाकिस्तान में शामिल

ऐसा इतिहास की कई किताबों में लिखा हुआ है कि नवाब महाबत खान भी कभी यह गलती नहीं करना चाह रहे थे. उनको मालूम था कि अगर भारत के साथ  ऐसा करते हैं तो तब कहीं ना कहीं इनको बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. यही कारण था कि जैसे ही नवाब साहब ने उन कागजों पर हस्ताक्षर किये थे जो पाकिस्तान को जूनागढ़ की कमान सौंप रहे थे इसके तुरंत बाद ही नवाब साहब भारत को छोड़कर पाकिस्तान भाग गये थे.

जूनागढ़ की रियासत में दो कुत्तों की शादी

भारत से भागने के लिए नवाब साहब के लिए पाकिस्तान से पानी का जहाज भेजा गया था. जूनागढ की जनता के साथ नवाब साहब ने जो धोखा किया था उसकी जिम्मेदार इनकी एक बेगम बताई जाती हैं. इस बेगम से नवाब जी बहुत प्यार करते थे और इसी के कहने पर पाकिस्तान में शामिल हुए थे.

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