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सलाम है इस भारतीय महिला डाक्टर को- जुड़वाँ बेटियों को अस्पताल में जन्म देकर भागी माँ, तो इस महिला डाक्टर ने बच्चियों को लिया गोद

सलाम है इस महिला डाक्टर को

सलाम है इस महिला डाक्टर को– मानवता आज बेशक कम हो चुकी है लेकिन खत्म तो बिलकुल नहीं हुई है. अखबार में सुबह उठते ही उलटी सीधी खबरों का दौर शुरू हो जाता है. कहीं से भी कोई भी अच्छी खबर नहीं आती है और दिल दर्द से भर जाता है. लेकिन आज हम आपको मानवता की सबसे बड़ी कहानी सुनाने जा रहे हैं उसको पढ़कर आपको वाकई यह दुनिया अच्छी लगने लगेगी.

दरअसल यह कहानी फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश की बताई जा रही है. एक सरकारी अस्पताल में ऐसी घटना है कि अस्पताल के साथ-साथ गाँव वाले भी एक महिला डाक्टर की दिल से वाह-वाही कर रहे हैं. तो आइये आपको दो जुड़वाँ बच्चियों की कहानी बताते हैं जो जन्म के समय ही अनाथ हो गयी थीं-सलाम है इस महिला डाक्टर को

सलाम है इस महिला डाक्टर को

डॉ. कोमल यादव वर्तमान में फर्रुखाबाद के एक निजी अस्पताल में तैनात हैं. डॉक्टर कोमल के मुताबिक उनकी ड्यूटी के दौरान 10 दिन पहले एक महिला ने अस्पताल में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था. लेकिन जन्म के बाद माँ ने बच्चियों को छोड़ने का फैसला लिया था. वाकई यह सुनकर अस्पताल की स्टाफ नर्स काफी हैरान हो गयी थीं.

सभी को लगा कि माँ मजाक कर रही है क्योकि दो इतने छोटे और मासूम बच्चों को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता था क्योकि ईश्वर ने लड़कियों को दुनिया में भेजा था. लेकिन वाकई माँ सीरियस थी और वह बच्चियों को अनाथ आश्रम में भेजने की जिद्द पर कायम थी.

सलाम है इस महिला डाक्टर को

तब 29 साल की अस्पताल की अविवाहित डाक्टर कोमल यादव आई सामने 

जब 29 साल की अस्पताल की डाक्टर ने यह सुना तो इन्होंने पहले माँ को समझाने का काम किया लेकिन जब दिखा कि अब मामला बिगड़ रहा है तो कोमल यादव ने दोनों बच्चियों को गोद लेने का मन बना लिया. मुश्किल एक ही थी कि अभी तो कोमल की शादी भी नहीं हुई है क्या कोई ऐसा लड़का मिलेगा जो दोनों बच्ची को अपना लेगा.

सलाम है इस महिला डाक्टर को

लेकिन कोमल ने सबकुछ भूलकर पहले इन दोनों मासूम जुड़वाँ बच्चियों को गोद लिया और इसके बाद सारे कागजी काम पूरे करने के बाद अविवाहित डाक्टर लड़की बच्चियों को लेकर अपने घर चली गयी हैं. जहाँ परिवार वाले कोमल के इस फैसले पर नाज कर रहे हैं. गाँव और अस्पताल वाले भी यही बोल रहे हैं कि अगर इन बच्चियों को आश्रम भेजा जाता तो ना जाने इनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता लेकिन आज अस्पताल डाक्टर कोमल यादव इन बच्चियों के लिए भगवान बनकर सामने आई हैं.

इस कहानी को पढने के बाद आप डाक्टर कोमल यादव के लिए क्या शब्द बोलना चाहेंगे? आपके जवाब हमें कमेन्ट बॉक्स के जरिये मिलते रहते हैं इसलिए इस लेख को शेयर करें और कमेन्ट जरुर करें.

 

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1 Comment

1 Comment

  1. Pooja sharma

    September 19, 2018 at 7:16 am

    Very nice hello mam yadi koi or baby mila to mujha bhi dilvana mujha bhi Ak baccha gode Lana h thanku

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