उस दिन अटल बिहारी वाजपेयी ने एम्स में भर्ती रहते हुए दोस्तों के साथ प्राइवेट वार्ड में पी थी शराब, पढ़िए अटल जी के बारें में सनसनीखेज खुलासा

अटल बिहारी वाजपेयी और एम्स की महफ़िल

अटल बिहारी वाजपेयी और एम्स की महफ़िल- अटल बिहारी वाजपेयी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने थे जो गैर कांग्रेसी थे. वाजपेयी जी के बारें में सबसे अच्छी बात यह बोली जाती है कि इस व्यक्ति के दोस्त ही दोस्त थे और दुश्मन कोई नहीं था. राजनीति में भी शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति रहा हो जो आज भी अटल जी के बारें में कुछ गलत बोल सके.

लेकिन आज हम आपको अटल बिहारी वाजपेयी जी का एक ऐसा किस्सा सुनाने वाले हैं जिसको सुनकर आप हैरान हो जाओगे. लेकिन आपको बता दें कि अटल बिहारी का यह खुलासा एक पुस्तक में किया गया है जिसका शीर्षक है- हार नहीं मानूंगा, एक अटल जीवन गाथा, इस पुस्तक के लेखक हैं- विजय त्रिवेदी. तो आइये पढ़ते हैं अटल बिहारी वाजेपयी और विस्की का यह बड़ा खुलासा- अटल बिहारी वाजपेयी और एम्स की महफ़िल

अटल बिहारी वाजपेयी और एम्स की महफ़िल

यह कहानी है साल 1975 के जुलाई महीने की. देश में आपातकाल लगा हुआ था और सभी नेताओं को जेल में डाल रखा था. अटल बिहारी वाजपेयी जो एक सांसद भी थे इनको भी सरकार ने बैंगलूर में जेल के अंदर बंद कर रखा था. इंदिरा गान्धी इस समय देश की प्रधानमंत्री थीं. बैंगलूर में वाजेपयी जी की तबियत बिगड़ रही थी. डॉक्टर को लगा अपेंडिक्स हो गया है. लेकिन ऑपरेशन के समय अपेंडिक्स की कोई समस्या नहीं दिखी तो डाक्टर ने दूसरी बीमारी का खुलासा किया.

अटल बिहारी वाजपेयी और एम्स की महफ़िल

इस बीमारी का नाम दिया गया स्लिप डिस्क और दिल्ली में वाजपेयी जी को ईलाजके लिए बोला गया. इसके बाद वाजपेयी जी को जेल से सरकार को रिहा करना था क्योकि एक सांसद को इस तरह से जेल मेंख नहीं सकते थे. लेकिन सरकार ने वाजपेयी जी को जेल में ना भेजकर दिल्ली के एम्स में भेज दिया ताकि सरकार भी निगाह रख सके और वाजेपयी जी एक तरह से जेल में भी रह सके.

अटल बिहारी वाजपेयी और एम्स की महफ़िल

एम्स के प्राइवेट वार्ड में अटल के साथ थे देवी प्रसाद त्रिपाठी

अटल बिहारी वाजेपयी का जिस प्राइवेट वार्ड में ईलाज चल रहा था उसी के बदल में देवी प्रसाद त्रिपाठी थे जो उस समय के बड़े नेता थे. शाम को वाजेपयी जी ने देवी प्रसाद जी से बोला कि देवी प्रसाद शाम का क्या इंतजाम है?

देवी प्रसाद समझ गये और वह एक पीसीओ के पास जाकर अपने किसी रिश्तेदार को विस्की लाने को बोलते हैं. वहीँ वाजपेयी जी ने इस महफ़िल के लिए चखने और चिकन का इंतजाम किया था. इसके बाद दोनों ने उस समय की राजनीति पर खूब चर्चा की थी. इंदिरा के गलत कामों की चर्चा इस महफ़िल में खूब की गयी थी.

अब आपको अगर ऐसा लगता है कि वाजपेयी जी का विस्की वाला किस्सा झूठा है तो आप इस किताब को पढ़ सकते हैं. आपको वाजेपयी जी के बारें में बताया गया यह किस्सा कैसा लगा है आप हमें कमेन्ट करके जरुर बतायें. आपके जवाब का हमको इन्तजार रहेगा.

 

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