भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा बाहुबली योद्धा- जिसने बनाया था भारत को सबसे पहले सोने की चिड़िया, घर-घर में लगा दिया था सोने का भंडार

भारत का नेपोलियन

भारत का नेपोलियन- दुनिया के नेपोलियन को कौन नहीं जानता लेकिन क्या आप अपने देश के नेपोलियन को जानते है. हमारे देश में भी एक ऐसे ही नेपोलियन ने जन्म लिया.

भारत का नेपोलियन कहलाने वाला समुद्रगुप्त एक असाधारण योद्धा था. वह एक बेहतरीन योद्धा के साथ साथ विश्व विजेता और अजातशत्रु था. वह वीरता के और युद्ध के कुरुक्षेत्र में अपने साहस से शत्रुओं का विनाश करने में पूरी तरह से सक्षम था. समुद्रगुप्त ने भारत को एकता के अटूट बंधन में बांधने का काम किया था. भारत का नेपोलियन

भारत का नेपोलियन

समुंद्रगुप्त ने अखिल भारतीय सम्राज्य की स्थापना की थी. समुद्रगुप्त के लिए देश को एक सूत्र में बांधना इतना आसान नहीं था जितना उन्होंने इसे अपनी वीरता के बल पर कर के दिखा दिखाया.  उन्होंने कभी भी अपनी जिंदगी में हार का सामना नहीं.

1328 ईस्वी में जन्में समुद्रगुप्त का शासनकाल 1378 ईस्वी तक रहा. उनके पिता चंद्रगुप्त ने अपने पुत्रों में से समुद्रगुप्त को ही अपना राज्य अधिकारी बनाया और अपने जीवन काल में ही अपना सारा राज्य सौंप दिया.

उनके सत्ता संभालने के बाद समस्त प्रजा बहुत ही खुश थे लेकिन समुद्रगुप्त के भाई यह देख कर अंदर ही अंदर जलते रहते थे. इस ईर्ष्या से उन्होंने अपने भाई समुद्रगुप्त के प्रति मृत्यु युद्ध का आरंभ शुरू कर दिया. समुद्रगुप्त के भाइयों का नेता कांच था. इस नाम से उस युग में सोने के सिक्के भी मिले हैं. इस अशांति को शांत करने के लिए समुद्रगुप्त को 1 वर्ष से अधिक का समय लगा और उसके बाद उन्होंने दिग्विजय यात्रा प्रारंभ कर दी.

भारत का नेपोलियन

समुद्रगुप्त ने अनेक छोटे-छोटे राज्यों को एकत्रित कर कर एक विशाल साम्राज्य का विस्तार किया था जिसने भारत की राजनीति एकता को सशक्त बना दिया था. समुद्रगुप्त वीणा के श्रेष्ठ वादक हुआ करते थे उन्होंने स्वयं से ही कुछ काव्य ग्रंथों की रचनाएं भी की जो समय के साथ दुर्भाग्यपूर्ण रूप से लुप्त हो गई.

भारत का नेपोलियन

उस वक्त में सम्पूर्ण भारत जिसमें अफगानिस्तान तक अपनी सीमा का विस्तार किया. चीन से आए एक गुप्तचर के अनुसार उन्होंने श्रीलंका के राजा के द्वारा एक खास दूत भेजने से प्राप्त संदेश पर गया में विशाल बौद्ध मंदिर और विहार बनवाया.

अपनी बहादुरी और युद्ध में परिपूर्ण कौशल के कारण वह भारत का नेपोलियन कहलाया. उन्होंने ब्रह्मपुत्र नर्मदा दक्षिण में कंधार उत्तर में कश्मीर तक अपना राज्य का विस्तार किया. अगर कोई भिक्षुक उनके पास आता तो वह उन्हें शुद्ध सोने के सिक्कें देते. उनका यही आदतें उसके विशाल शासनकाल के वैभव का प्रतीक था.

भारत का नेपोलियन

वह एक मात्र ऐसा राजा था जिन्होंने अपनी प्रजा को कभी दुख का आभास नहीं होने दिया. वह बहुत उदार धार्मिक दृष्टिकोण वाला एक वीर योद्धा था.

हमारे देश को सोने की चिड़िया का दर्जा समुद्रगुप्त काल में ही मिला था क्योंकि उन्होंने अपने शासनकाल में युद्ध के अलावा चरित्र व्यक्तित्व, संगीत काला प्रेम और अनेक उपलब्धियों का विस्तार किया. यही कारण हैं कि नेपोलियन कहलाए जाने वाले समुद्रगुप्त के एक विराट छवि का आकलन किया गया.

अपने 45 वर्षों के छोटे से शासनकाल में उन्होंने अनेक उपलब्धियों को अपने नाम किया और भारत का नेपोलियन कहलाए जाने का गौरव प्राप्त किया. समुद्रगुप्त की मृत्यु 380 ईसापूर्व में हो गई थी. समुद्रगुप्त ने अपनी जिंदगी में कभी हार नहीं मानी इसलिए भारत का नेपोलियन समुद्रगुप्त एक विशाल सम्राट था.

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