गूंगी इंदिरा की अनोखी आवाज- पढ़िए उस कहानी को जब इंदिरा गाँधी ने सरेआम किया था पागलों जैसा व्यवहार

इंदिरा गाँधी का अजीबोगरीब इंटरव्यू

साल 1975 को भारत में एक बड़ा आपातकाल लगा था. इंदिरा गाँधी की सदस्यता को अदालत ने अमान्य घोषित कर दिया था और इसके बावजूद भी इंदिरा सत्ता को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुई थीं. देश में लगातार पहली बार इंदिरा गाँधी के विरुद्ध हवा चल रही थी. 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगा दिया गया था. अख़बारों पर रोक लगा दी गयी थी और नेताओं को जेल में डाला जा रहा था.

25 जून को दिल्ली के रामलीला मैदान में भारी संख्या के अंदर जनता जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में जमा हुई थी. इसी मैदान पर जब दिनकर की पंक्तिया बोली गयी कि सिंहासन खाली करो कि जनता आती है. इन पंक्तियों को जब इंदिरा गाँधी ने सुना होगा तो वह समझ गयी होंगी कि जनता उनसे प्रधानमंत्री पद को छोड़ने के लिए बोल रही है.

लेकिन इंदिरा गाँधी ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे की सलाह पर धारा-352 के तहत देश में आंतरिक आपातकाल लगाने का फैसला किया था. इसके बाद राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के दस्तख्त्त के साथ देश में आपातकाल को लागू कर दिया गया था. यहाँ तक की कहानी शायद आपको समझ आ गयी होगी. आपातकाल लागू होने के बाद देश में अधिकतर उन नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था जो सरकार के खिलाफ थे.

इंदिरा गाँधी का अजीबोगरीब इंटरव्यू

अब आपको आपातकाल के बाद इंदिरा का पहले इंटरव्यू के बारे में बताते हैं

सईद नक़वी (वरिष्ठ पत्रकार), अपने एक लेख में इस बात का जिक्र खुद नकवी जी ने किया है. आइये पढ़ते हैं कि यह बड़ा पत्रकार क्या लिखता है-  “मुझे एक काम दिया जिससे मुझे श्रीमती गांधी के उस पक्ष को देखने का मौका मिला जो मुझे नहीं लगता कि किसी और ने देखा होगा. मैं संडे टाइम्स लंदन के इंटरव्यू के सिलसिले में उनसे मिला. मैं भारत में उसका स्ट्रिंगर था. यह बहुत ही सनसनीखेज होने वाला था क्योंकि इंदिरा गांधी के आपातकाल घोषित करने के बाद से यह उनका पहला इंटरव्यू था. श्रीमती गांधी बिल्कुल ख़ामोश रहीं. उन्होंने मेरे एक भी प्रश्न का जवाब नहीं दिया. वो चेहरे पर बिना किसी हाव-भाव के बस दीवार की ओर टकटकी लगाकर देखती रहीं, और एक क़ागज पर बिना देखे कुछ बनाती रहीं.”

शायद इंदिरा गाँधी का यह पश्चाताप था कि उन्होंने इतिहास के पन्नों में अपने नाम के साथ जो लिखा है उसे भारत का बच्चा-बच्चा सदा याद रखने वाला है.

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