सन 1318 कश्मीर का वो काला दिन जब हिन्दुओं को मार-मारकर उनका धर्म बदलवाया गया था, खुलासा कश्मीर के मुसलमान थे कभी सच्चे हिन्दू

Kashmir was a hindu state

Kashmir was a hindu state- इतिहास की एकदम सही और सटीक जानकारी आप लोगों तक पहुंचाना डेमोक्रेटिक वॉइस ऑफ इंडिया का मुख्य धर्म है. ऐसी ऐतिहासिक जानकारी जो शायद आप लोगों तक आज तक नहीं पहुंचाई गई है, यह काम डेमोक्रेटिक वॉइस ऑफ इंडिया इस समय कर रहा है,

आज हम कश्मीर के पंडितों की उस पहली भूल को आपके सामने रख रहे हैं जिसके कारण आज का कश्मीर जल रहा है. अगर यह गलती कश्मीरी पंडित 1318 में नहीं करते हैं तो निश्चित रुप से आज कश्मीर में कश्मीरी पंडित और बाकी सभी धर्मों के लोग भी आराम से शांति पूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहे होते. Kashmir was a hindu state

Kashmir was a hindu state

आज का भारतीय कश्मीर जल रहा है, जहां ना शांति है और ना अमन है. लेकिन यही कश्मीर कभी हिंदुओं का सबसे पवित्र स्थान हुआ करता था. इस कश्मीर में घर-घर ,गली-गली में शिव के मंदिर हुआ करते थे. कश्मीर से आज कश्मीरी पंडितों को बाहर निकाल दिया गया है. इस दर्दनाक कहानी के पीछे कहीं ना कहीं कश्मीरी पंडितों का ही हाथ है.

Kashmir was a hindu state

तो आइए आज हम आपको 1318 की एक ऐतिहासिक कहानी सुनाते हैं. आपको इस इतिहास से पहले अवगत कराएं तो उससे पहले आपको यह बता दें कि यह इतिहास डॉ नित्यानंद लेखक ने ‘भारतीय संघर्ष का इतिहास’ नामक पुस्तक में लिखा है.  यह पुस्तक जागृति प्रकाशन नोएडा से प्रकाशित हुई है. इसलिए हम आपको बता दें कि हमारा यह इतिहास पूरी तरीके से पुस्तक में प्रमाणित है और यदि आपको इस इतिहास में कोई भी परेशानी या दिक्कत है तो आप पुस्तक के लेखक और प्रकाशक दोनों पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं.

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पुस्तक में लिखा हुआ है कि रिनचिनशाह नामक एक साहसी राजवंशीय कुमार लद्दाख से कश्मीर आया था. थोड़े ही समय में रिनचिनशाह नाम का यह राजकुमार इतना प्रभावी बन गया था कि कश्मीर के राजा रामचंद्र की हत्या कर वह कश्मीर का स्वामी बन गया था और रामचंद्र की पुत्री कोटारानी से विवाह कर लिया था. रिनचिन शाह एक बौद्ध धर्म का अनुयायी था.

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रिनचिनशाह की इच्छा हुई कि वह शैव हिंदू धर्म ग्रहण कर ले. तब वह हिन्दू शैव धर्माचार्य देवस्वामी की शरण में गया. परंतु देवस्वामी ने  रिनचिन को हिन्दू धर्म में शामिल करने से मना कर दिया था.  यह बात रिनचीन शाह को काफी बुरी लगी और वह सुबह होते ही सूफी बुलबुलशाह की अजान सुनकर उनके पास गया तो बुलबुलशाह से रिनचिन ने इस्लाम की दीक्षा ली थी.

जिसके बाद इसी राजा के राज्य में अधिकतर हिंदुओं को मुसलमान बनाने का एक गंदा और घिनौना खेल हुआ था. लेकिन हिंदू धर्मचार्य देवस्वामी अगर उस समय रिनचीन को हिंदू धर्म में शामिल कर लेते तो निश्चित रूप से आज कश्मीर में कश्मीरी पंडित बड़े ही अमन और चैन के साथ रह रहे होते.

इस इतिहास को आज ज्यादा से ज्यादा शेयर किये जाने की आवश्यकता है ताकि कश्मीर का यह इतिहास भी हिन्दू पढ़ें जो यह बोलते हैं कि कश्मीर नेहरू के शासनकाल में भारत के हाथों से गया है. आपको बता दें कि कश्मीर देश के कश्मीरी पंडितों और हिन्दुओं की वजह से आज इस हालत में पहुचा है.

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