पढ़िए कैसे सन 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी ने दोस्त आडवाणी को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया था

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने की कहानी

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने की कहानी- साल 1984 के आम चुनावों के बाद से ही बीजेपी में आडवाणी का नाम वाजपेयी से ऊपर आ गया था. संघठन का सारा काम तो जहाँ एक तरफ आडवाणी देख ही रही थे वहीँ पार्टी को 2 सीट से अब 80 से ज्यादा सीट तक आडवाणी लेकर आ गये थे. वहीँ दूसरी तरफ वाजपेयी का कद पार्टी में कम हो गया था.

यहाँ तक कि साल 1990 के आसपास तो अटल बिहारी वाजेपयी का कद बीजेपी और संघ में इतना कम हो गया था कि अटल तो पार्टी से इस्तीफ़ा देकर जनता दल में शामिल तक होने की सोच रहे थे. यह बात जो आज हम आपको बता रहे हैं यह कहानी है साल 1995 की. देश में लाला कृष्ण आडवाणी का नाम बच्चा-बच्चा बोल रहा था. राम मंदिर में आडवाणी के साथ देश का जन-जन साथ जुड़ चुका था. तो आइये आपको हम एक ऐसा राजनैतिक किस्सा सुनाने जा रहे हैं कि आपको आज मालूम चलेगा कि कैसे सन 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी ने दोस्त आडवाणी को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया था- अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने की कहानी

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने की कहानी

किस्से की शुरुआत ही हम बीजेपी के एक अधिवेशन से करते हैं. दरअसल साल 1995 में मुंबई के अंदर एक बीजेपी का अधिवेशन हुआ था. यह अब तक का बीजेपी के इतिहास में सबसे बड़ा अधिवेशन बताया जाता है. 11 नवंबर को अधिवेशन था तो 12 तारीख को एक बड़ी जन रैली होनी थी. तो अब इसी जन रैली में जो हुआ उसने वाकई इतिहास को बदल दिया है. 12 नवंबर की रैली में इस समय मंच पर बीजेपी और संघ से जुड़े हुए सभी बड़े नाम मौजूद थे. प्रमोद महाजन और के.एन गोविन्दाचार्य भी रैली में मौजूद थे. इसी जगह में अगले साल होने वाले चुनावों के लिए बीजेपी का प्रधानमंत्री का नाम घोषित होना था.

सभी को तय था कि अगले साल बीजेपी लाल कृष्ण आडवानी को अपना चेहरा बनाकर चुनाव में उतरने वाली है. लेकिन 12 नवंबर 1995 को हुए इस रैली में जब लाल कृष्ण आडवाणी मंच पर बोलने आते हैं तो वह बोलते हैं कि अब समय आ गया है जब बीजेपी के अध्यक्ष के नाते मैं यह बोलूं कि अबकी बारी अटल बिहारी. आगे आडवाणी ने साफ किया कि 1996 में बीजेपी वाजपेयी को अपना प्रधानमंत्री बनाकर चुनाव लड़ने वाली है.

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने की कहानी

इसके बाद कहते हैं कि वाजेपयी ने मंच पर आडवाणी की बात काटने की कोशिश की थी लेकिन आडवाणी ने साफ़ बोला था कि बतौर अध्यक्ष इस बात की घोषणा मैं कर चुका हूँ. बाद में बीजेपी के इतिहास के सबसे ताकतवर संघठन मंत्री के. एन. गोविन्दाचार्य ने आडवाणी इस बात को लेकर लड़ाई भी की थी और संघ भी इस हरकत से बेहद नाराज हो गया था. किन्तु आडवाणी जानते थे कि वाजेपयी के रहते वह कैसे प्रधानमंत्री बन सकते हैं क्योकि वाजपेयी ने ही बीजेपी का जैसे निर्माण किया था. तो इतिहास में आडवाणी 1996 के अंदर अटल बिहारी के चलते प्रधानमंत्री नहीं बन पाए थे. इस किस्से से जुडी अन्य कुछ कहानियां हम आपको अपने अगले लेख में बतायेंगे.

 

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