भगवान राम का वंशज है ये राजपरिवार, ऐसी है इस रॉयल फैमिली की लाइफ, जानिये क्या हैं हिला देने वाला पूरा सच

Lord Rama family

Lord Rama family- आपको जानकर यह बड़ी हैरानी होगी कि आज भी पृथ्वी पर भगवान राम के वंशज हमारे साथ, हमारे बीच रहते हैं. यह एक रोचक तथ्य हैं. जो राजवंश खुद को भगवान राम का वंशज बताते हैं वह आज राजस्थान में रहते हैं. यह राजघराना राजस्थान के शहर जयपुर के शहर में बसा हुआ है.

जयपुर की महारानी पद्मिनी देवी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनका परिवार राम के बेटे कुश के वंशज है. पद्मिनी के पति और जयपुर के प्राचीन महाराजा भवानी सिंह को उसके 390 वंशज के रुप में जाना जाता है. भारत देश राजाओं की आन-बान-शान और राजशाही परिवारों के लिए जाना जाता है. जब राजाओं का नाम आता है तो हमारे सामने निश्चित रूप से भगवान राम, कृष्ण भगवान आदि के नाम स्वयं प्रकट हो जाते हैं. Lord Rama family

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इस राजघराने की कुछ प्रमुख हस्तियां है जिनके बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं. 21 अगस्त 1912 को जन्में महाराजा मानसिंह ने 3 शादियां की.

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पहली शादी 12 साल की उम्र में जोधपुर के राजा सुमेर सिंह की बहन मरुधर कंवर से हुई थी. दूसरी शादी उनकी पत्नी की इकलौती भतीजी किशोर कुमार से सन 1932 में हुई थी. इस के 8 साल के बाद उन्होंने 1940 में गायत्री देवी से तीसरी शादी की.

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महाराजा सवाई मान सिंह और उनकी पत्नी मरुधर कंवर के एकलौते बेटे भवानी सिंह की शादी मधुबनी देवी से हो गई. इनकी एकरमात्र इकलौती बेटी दिया कुमारी थी जिसकी शादी नरेंद्र सिंह से हुई थी.

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दिया कुमारी के दो पुत्र थे. पद्मनाथ वह लक्ष्यराज. वर्तमान समय में दिया कुमारी माधोपुर से भाजपा की विधायक है जो वहां से अच्छे मतों से विजय प्राप्ति कर वहां शासन कर रही है.

एक इंटरव्यू में पद्मिनी ने बताया था कि उनका परिवार राम के बेटे कुश के परिवार के वंशज हैं. उनके पति और जयपुर के पूर्व महाराज भवानी सिंह कुश के 309वें वंशज थे.

महारानी पद्मिनी देवी अक्सर अपने राज्य के बड़े-बड़े सामाजिक कार्यों में नजर आती हैं. परिवार के अधिकांश सदस्य राजनीति से संबंध रखते हैं. जनता इनको बड़े प्यार से वोट देकर जीता रही है.

भवानी सिंह का कोई भी बेटा नहीं था. उन्होंने अपनी प्रिय बेटी दिया से दो बेटों को गोद लिया था. जब भगवान सिंह की मृत्यु हो गई थी तब सन 2011 में पद्मनाम का राज तिलक हुआ था और उनके सबसे छोटे बेटे लक्ष्यराज ने 2013 में विरासत को संभाला. देश में रजवाड़ों की प्रथा पूरी तरह से को खत्म हो गई हो लेकिन इनकी राजशाही आज भी कायम है.

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