डॉलर हमेशा बढ़ता और अपना भारतीय रुपया हमेशा घटता क्यों है, उठा दिया है आज हमने इस रहस्य से पर्दा

why dollar rate is high in india
why dollar rate is high in india– एक जमाना था जहां एक रुपए की कीमत बहुत थी. आज एक ज़माना है जहां एक रुपए काम मोल कुछ भी नहीं. पहले के लोग 1 रूपए से ना जाने क्या-क्या चीजें खरीद लिया थे लेकिन आज एक रुपए से आप एक टॉफी तक नहीं खरीद सकते.आप देख सकते हैं कि भारतीय रुपया का मूल्य डॉलर के मुताबिक काफी कम हो चुका है.
जबकि इतिहास के पन्नों में अगर आप देखे तो आप पाएंगे कि 1947 में एक रुपए की कीमत 1 डॉलर हुआ करता था लेकिन आज यह बढ़कर 72.36 रुपया हो गया है. अब सबके मन में यही सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या कारण है जिसकी वजह से रुपए लगातार घटते जा रहा हैं और डॉलर बढ़ता जा रहा हैं. तो आज इससे जुड़े हर सवालों का जवाब इस आर्टिकल में देने की कोशिश करेंगे.
why dollar rate is high in india
बात बिल्कुल सीधी सी है.भारत के पास जितना कम डॉलर होगा डॉलर का भाव उतना ही बढ़ेगा.कोई भी देश अपनी जरूरत की चीजें या तो बनाता है या फिर किसी दूसरे देश से खरीदता है. तो जब कोई देश किसी दूसरे देश से सामान खरीदता है तो उसकी किमत उस देश की करेंसी से चुकानी पड़ती है. तो इसका मतलब बिल्कुल साफ है कि अगर भारत विदेशों से सामान आयात करेगा है तो उसे डॉलर या यूरो में भुगतान करना पड़ेगा. अब सवाल है कि आखिर अंतरराष्ट्रीय खरीददारी के लिए हम डॉलर कहां से लाए? हम आपको बता दें डॉलर हमारे देश में विभिन्न प्रकार से आती है. जैसे –
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1. जिस तरह भारत देश किसी भी देश से सामान खरीदता है तो उस देश की करेंसी से उसका भुगतान करता है. ठीक उसी तरह अगर हम अपना सामान विदेशों में बेजते हैं तो हमें वहां से डॉलर मिलता है.
2. विदेश की कंपनियां जब हमारे देश में कारोबार लगाती है या फिर किसी शेयर बाजार में अपना पैसा लगाती है तो वहां से भी हमें डॉलर की प्राप्ति होती है.
3. विदेश में रहने वाले भारतीय जो भी पैसा कमाते हैं और उसे अपने देश भेजते हैं तो इससे भी हमारा विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ता है.
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यहां से तो एक बात समझ में आ रही है कि विदेशों से खरीदारी करने पर हमें डॉलर चाहिए होता है. इसलिए जरूरत होती है कि हम ज्यादा से ज्यादा डॉलर को बचाकर रखें. इसे हम विदेशी मुद्रा भंडार भी कहते हैं. लेकिन किसी कारणवश या भंडार खत्म हो जाता है तो यह हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकता है. हमारे देश का आयात और निर्यात बिल में एक संतुलन बना होना चाहिए.ऐसा नहीं हो पाता है तो विदेशी मुद्रा की कमी होने लगती है.जिसे हम करेंसी डेफिसिट कहते हैं. लेकिन अभी भी यह सवाल बना है कि आखिर रुपए को मजबूत करने के लिए हमें क्या करना होगा?
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1. सबसे पहला कारण यह है कि अपने देश में ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन बढ़ाना होगा ताकि हम अपनी चीजें विदेशों में भेज सकें.
2. दूसरा कारण यह है कि अपनी चीजों को अपनाना होगा. यानी अगर हम अपने देश में बन रहे वस्तुओं का इस्तेमाल करेंगे तो हमें किसी विदेश से उनका आयात नहीं करना पड़ेगा.
3. हम बड़ी मात्रा में तेल का आयात अन्य देशों से करते हैं क्योंकि देश में तेल का उत्पादन माँग के अनुसार नहीं है. यदि हम तेल पर आश्रित अर्थव्यवस्था को बदलने की कोशिश करेंगे तो विदेशी भंडार का एक बहुत बड़ा हिस्सा हम बचा पाएंगे.
4. आपको पता होगा कि भारत देश में सोने की मांग कितनी है. विवाह किस समय सोने की मांग और भी बढ़ जाती है जिसके कारण हमारे देश का आयात बिल बढ़ने लगता है.जिसे हमें कम करने की जरूरत है.
इसके अलावा अपने स्तर पर कोशिश करनी होगी कि हम विदेशी चीजों को कम से कम इस्तेमाल करें और स्वदेशी को अपनाएं. यह भी ख्याल रखें कि जो चीजें हम अपने देश में बना सकते हैं या उप जा सकते हैं उन चीजों को हम विदेशो से ना खरीदें.एक पहल यह भी कर यह भी कर सकते हैं कि हम अपनी जरूरतों को कम कर सकते हैं. इस तरीके से हम अपने रुपए का मूल्य डॉलर के बराबर कर पाएंगे.(जया कुमारी)

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