पेड़ों को बचाने के लिए महिलाओं ने बच्चों को करवाया खुलेआम ब्रेस्टफीडिंग-तस्वीरें जिन्होनें बचाया पेड़ों का जीवन

पेड़ ही जीवन है

पेड़ ही जीवन है- इस दुनिया में बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जो प्रकृति को बचाने के लिए जुनूनी हो जाये. भारत में प्रकृति और पेड़ बचाने के लिए कई बार आन्दोलन हुए हैं. लेकिन आज हम यूरोप और उसके आसपास हुए एक बड़े साफ़-सुथरे आन्दोलन के बारें में बताते हैं जिसने वाकई दुनिया के एक काफी बड़े हिस्से में सकारात्मक बदलाव ला दिया है.

आपको बता दें कि यूरोप में ऐसा हुआ कि यहाँ की एजेंसी ने पेड़ों को काटने का फरमान जारी किया. यह बात यहाँ के पुरुषों को उतनी बुरी नहीं लगी, जितनी की माहिलाओं को बुरी लगी. तो इसके बाद सारा आन्दोलन महिलाओं ने अपने दम से लड़ा. तो आइये आपको बताते हैं कि महिलाओं ने ऐसा क्या किया कि सरकार को भी इनके आगे झुकना पड़ा था- पेड़ ही जीवन है

 पेड़ ही जीवन है

तस्वीर नम्बर एक और लड़ाई

सोशल मीडिया पर आन्दोलन शुरू हुआ कि पेड़ भी घरती के बच्चे हैं और इनको काटकर गलत किया जा रहा है. जैसे एक माँ अपने बच्चे को पालती है उसी तरह से यह घरती भी अपना खून पिलाकर पेड़ों को बड़ा करती है. सोशल मीडिया की यह कहानी आगे बढ़ने लगी.

 पेड़ ही जीवन है

तस्वीर नम्बर 2 और महिलायें आई सामने

जब इस बात की चर्चा ज्यादा हुई तो उस समय कई महिलायें अपने छोटे बच्चों को सामने लेकर आई और बाहर निकलकर इन्होंने अपने बच्चों को प्रकृति की तरह से ही पालना शुरू किया.

 पेड़ ही जीवन है

तस्वीर 3 में साफ़ है प्रकृति का दर्द

महिलायें पेड़ों के नीचे बैठकर अपने बच्चों को पाना प्यार बाटने लगी और इनका यही बोलना था कि अगर पेड़ कटते हैं तो इनके साथ वह भी काटी जाए.

 पेड़ ही जीवन है

तस्वीर 4 से साफ़ है महिलाओं का दर्द

जब महिलायें इस तरह से बाहर आकर अपने बच्चों से देखी गयी तो उन संस्थाओं की बड़ी बेज्जती हुई जो पेड़ काटने सामने आई थीं.

 पेड़ ही जीवन है

तस्वीर 5 ने बदल दी सबकी सोच

इसके बाद कई पेंटर भी सामने आये जिन्होनें कई तरह की तस्वीरें बनाई है. इस पूरे आन्दोलन ने जैसे लोगों की सोच ही बदल दी है.

अब इस कहानी से साफ़ है कि प्रकृति से प्यार करने वालों की कमी दुनिया में नहीं है. बस हमें समझना होगा कि प्रकृति, पेड़ अगर नहीं रहे तो धरती पर जीवन ही जैसे खत्म हो जायेगा.

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