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इतिहास

भारत में है 12 हजार साल पुराना एक शहर, नासा भी कर चुकी है इस भारतीय शहर पर रिसर्च

विश्व का सबसे पुराना एक शहर

विश्व का सबसे पुराना एक शहर- भारत विश्व में एक ऐसा देश हैं जहां की हर एक चीजों में कुछ न कुछ छुपा हुआ है. यहां सब का एक अपना इतिहास रहा है. आज हम आपको एक ऐसे शहर के इतिहास के बार में बता रहे हैं जो शरीर और ब्रह्माण्ड से मिलकर बना है. इस शहर के बारे में कहा जाता है कि यह भगवान शिव के त्रीशुल पर खड़ा है न कि धरती पर. हम बात काशी की कर रहे हैं. इसका इतिहास पढ़ने के बाद आप समझ जाएंगे कि यह धरती पर एक ऐसा मशीन है जिसकी रचना मानव शरीर की तरह हुआ है.

बनारस सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि एक यंत्र है. इस यंत्र का एक एक भाग अध्यात्मिक है. यहां 72 हजार धार्मिक स्थल है जो कि मानव शरीर के 72 हजार नाड़ियों की तरह बना हुआ है. 468 मंदिरों से बने इस शहर में मुख्य मंदिरों में आधे शिव मंदिर हैं और आधे देवी के मंदिर जो मानव शरीर के आधे भाग पुरुष और आधे नारी के समान है. विश्व का सबसे पुराना एक शहर-

विश्व का सबसे पुराना एक शहर

इतना ही नहीं चंद्र कैलेंडर में 13 महीना होता है. वहीं नव ग्रह और चार दिशाएं होती है. अगर इनका गुणनफल निकाला जाए तो यहां के मंदिरों की संख्या के बराबर यानि 468 होता है.

इसका इतिहास सिर्फ अध्यात्मिक ही नहीं शिक्षा का भी है. हजारों सालों से यहां इसका इतिहास गौरवशाली रहा है. भगवान बुद्ध 500 बीसी में खुद यहां रहने आए. यही वो जगह है जहां गौतम बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था. जिस नालंदा विश्वविद्यालय को शिक्षा के क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा स्थान माना जाता है वह काशी के ज्ञान के एक छोटी सी बूंद माना जाता है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा के जगह में बनारस का कितना बड़ा योगदान है.

विश्व का सबसे पुराना एक शहर

यहां का इतिहास 12400 साल से भी अधिक का है. आज से बारह हजार चार सौ साल पहले ही यहां शिव को देवता मान लिया गया था. खुद शिव जी यहां निवास करते थे. नासा जैसी संस्थान भी विश्व के इस सबसे पुराने शहर पर कई रिसर्च कर चुकी है. यहाँ की मिटटी और पानी पर अब तक कई शोध हुए हैं.

हिमालय के बाद अगर शिव कहीं रहे तो यह काशी ही था. जब उनकी शादी हुई तो वो सर्दियों के समय में अपनी पत्नी के साथ यहां रहने आते थे. उन्होंने पूरी धरती पर से सिर्फ इसी काशी को ही अपने रहने के लिए चुना. इससे बड़ी बात क्या हो सकती है कि जिस धरती को खुद शिव ने चुना हो उसमें कुछ तो खास बात होगी. यही कारण है कि यहां जाने वाले कभी वापस नहीं आना चाहते हैं.

 

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