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हिन्दू इतिहास की सबसे भयानक लड़ाई- जिसमें अकेले 1 हिन्दू योद्धा ने अरबी हमलावरों को गाजर-मूली की तरह काटा था

बप्पारावल की वीर गाथा

बप्पारावल की वीर गाथा- यह एतिहासिक कहानी उन दिनों की है जब भारत पर बाहरी आक्रमणकारी लोगों ने हमला शुरू कर दिया था. अरब और इरान से कई शासक लगातार हिन्दुस्तान पर हमला कर रहे थे. बाहरी इस्लाम लगातार भारत पर लूट के लिए कब्जा कर रहा था. इसी कड़ी में मोहम्मद बिन कासिम भारत आया था और इतिहास बताता है कि इस युवा योद्धा ने सिंध के राजा दाहिर को बुरी तरह से हराया था.

यहाँ तक की कहानी तो भारत के बच्चों को पढ़ा दी जाती है लेकिन मोहम्मद बिन कासिम को किसने उसके में घुसकर हराया था. यहाँ तक मोहम्मद बिन कासिम की असली कहानी यह है कि जब कासिम सिंध से आगे बढ़ा तो अच्छे-अच्छे राजाओं की हालत खराब हो गयी थी. कासिम लगातार हिन्दू औरतों की इज्जत लूट रहा था. बच्चों का कत्लेआम कर रहा था लेकिन कोई भी हिन्दुतानी राजा इसकी टक्कर नहीं ले पा रहा था. तब यह खबर शिव के भक्त और राजस्थान के हिन्दू शेर योद्धा बप्पारावल तक आती है. तो आइये आज हम आपको बप्पारावल की यश गाथा बताते हैं जिसके डर से सालों तक भारत में कोई  विदेशी आक्रमणकारी भारत पर आँख नहीं उठा पाया था- बप्पारावल की वीर गाथा

बप्पारावल की वीर गाथा

बप्पारावल तुरन्त अपनी सेना को जोड़ते हैं 

मोहम्मद बिन कासिम की टक्कर लेना आसान नहीं था. इसके पास लाखों सैनिकों की सेना थी. कई लाख तो इसकी सेना में धोड़े ही थे. राजा दाहिर के पुत्र जयसिंह ने कासिम से डरकर जान बचाते हुए चित्तोड़ में शरण ली थी. अब यहाँ कासिम को यह नहीं पता था कि बप्पारावल उसका भिखारियों जैसा हाल कर देंगे. कासिम ने चित्तोड़ पर हमला किया और यहाँ भयंकर युद्ध हुआ.

बप्पा रावल गहलौत राजपूत वंश के आठवें शासक थे और उनका बचपन का नाम राजकुमार कलभोज था. जब कासिम से युद्ध हुआ तो बप्पारावल ने अजमेर और जैसलमेर जैसे छोटे राज्यों को भी अपने साथ मिला लिया और एक बलशाली शक्ति खड़ी की. इसके बाद मोहम्मद बिन कासिम को युद्ध में ऐसे हराया था कि जान बचाकर यह सिंध भाग गया था. सिंध के पश्चिमी तट तक कासिम को मारते हुए लेकर गये थे बप्पारावल.

बप्पारावल की वीर गाथा

इसके बाद बप्पारावल ने गजनी पर भी आक्रमण किया था और वहां के राजा सलीम को बुरी तरह से हराया था. गजनी पर कब्ज़ा करने की बाद गांधार, खुरासान, तूरान और ईरान को भी अपने राज्य में मिला लिया था. इसके बाद कुछ 20 साल राज करने के बाद बप्पारावल ने सन्यास ले लिए था और शिव की आराधना में लीन हो गये थे.

इस वीर योद्धा बप्पारावल की कहानी को आज हमारे बच्चे जरुर पढ़ें ताकि वह समझ जाए कि हमारे शरीर में किसी कायर का नहीं बल्कि वीर योद्धाओं का खून है. भारत पर आँख उठाने वालों का हम कैसा हाल करते हैं यह आज हमें जानने की आवश्यकता है. 

 

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1 Comment

1 Comment

  1. iqbal rana

    November 15, 2017 at 5:01 pm

    Fake news. Md bin qasim k character par ungli uthane wale chutiye pahle history padho tab news chhapi otherwise tum par case kiya jayega

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