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जोधपुर के पाकिस्तान में शामिल होने का किस्सा, अगर ये वफादार अंग्रेज नहीं होता तो सरेआम लूट जाती भारत माता की इज्जत

जोधपुर के पाकिस्तान में शामिल होने का किस्सा

जोधपुर के पाकिस्तान में शामिल होने का किस्सा- 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद तो हुआ लेकिन यह आज़ादी वाकई इतनी आसान नहीं थी जितनी की इसे आप आज समझ रहे हैं. जैसा कि हमने पहले के अपने लेख में बताया कि भारत का बंटवारा मात्र 2 टुकड़ों में नहीं हुआ था. बल्कि भारत को 565 टुकड़ों में बांटा गया था.

जोधपुर रियासत के ऊपर इस समय सभी की निगाह थी. राजा हनुमंत सिंह जो इस समय यहाँ के प्रमुख थे वह पाकिस्तान में शामिल होने का पूरा मन बना चुके थे. तो आइये आपको आज हम जोधपुर की कहानी सुनाते हैं जो उस समय अगर पकिस्तान में शामिल हो गया होता तो कितना बुरा हो गया होता- जोधपुर के पाकिस्तान में शामिल होने का किस्सा

जोधपुर के पाकिस्तान में शामिल होने का किस्सा

आज़ादी से कुछ 10 या 11 दिन पहले ही जोधपुर के राजा यह घोषणा करते हैं कि वह भारत में शामिल नहीं होंगे. जब यह घोषणा हुई तो भारत में भूचाल आ गया था. अगर जोधपुर पाकिस्तान में शामिल हो जाता तो इससे जैसे भारत का दिल राजस्थान से भारत का संपर्क खत्म हो जाता. जोधुपर की सीमा पाकिस्तान से लगी हुई थी. इसके साथ-साथ जैसलमेर और बीकानेर भी जोधपुर के राजा के रिश्तेदार थे इसलिए यह रियासतें भी पाकिस्तान में शामिल हो जाती. तब आज के भारत की शक्ल ही बदल गयी होती. भारत का तो जैसे एक हाथ ही कटने वाला था.

महात्मा गाँधी जैसे नेता के चेहरे ही हालत खराब हो गयी थी. महात्मा गाँधी तुरंत सरदार पटेल को अपने पास बुलाते हैं और पूछते हैं कि जोधपुर से वह बात क्यों नहीं कर रहे हैं. तब सरदार पटेल का जवाब था कि राजा हनुमंत सिंह से उनकी बातचीत हुई थी. उन्होंने वादा किया था कि वह भारत में शामिल हो जायेंगे. लेकिन शायद पाकिस्तान जिस तरह से जोधपुर को लाभ दे रहा है और कराची पोर्ट भी जोधपुर को देने को तैयार है इसके बाद जोधपुर का मन शायद बदल गया है.

जोधपुर के पाकिस्तान में शामिल होने का किस्सा

लेकिन आपको बता दें कि जब जोधपुर के राजा वायसराय माउन्ट बेन्टन से मिलने आये तो राजा ने भारतीय सहायक बी.पी मेनन पर पिस्तौल तान दी थी बात ज्यादा आगे बढ़ती तो तभी  माउन्ट बेन्टन आ गए थे. तब माउन्ट बेन्टन ने राजा हनुमंत सिंह को समझाया था कि जोधपुर का भविष्य पाकिस्तान के साथ नहीं बल्कि हिन्दुस्तान के साथ सुरक्षित है. तो इस तरह से जोधपुर भारत में शामिल हुआ था.

आपको हमारी यह इतिहास की कहानी कैसी लगी है आपहमें कमेन्ट करके जरुर बतायें साथ ही साथ इस कहानी को शेयर करके भी आप भारत के इस इतिहास को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचा सकते हैं.

 

यह भी जरुर पढ़ें- किस्सा 6 अगस्त 1947 का- भारत की आज़ादी से 9 दिन पहले मोहम्मद अली जिन्ना ने इस आदमी के सामने बनाया था भारत के टुकड़े-टुकड़े कर देने का प्लान

1 Comment

1 Comment

  1. Megha Ram

    November 27, 2017 at 1:24 pm

    श्रीमानजी आगे क्या हुआ जब राजा से एक बंद कमरे मे पटेल साहब ने भारत के पक्ष मे हस्ताक्षर कराया थथाराजा के पास एक तलवार व पिस्टल दोनो थीउसका क्या क्या हहुआपटेल साहब ने किस गेट से राजा को बाहर निकाला ।बीकानेर राजघराने से पटेल साहब के क्या रिस्ता था।
    आपने जो बताया उसके लिए आपको धन्यवाद।

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