Connect with us

भारत में शौच का आविष्कार- मुस्लिमों से करोगे हिन्दू तुम प्यार, बड़ी रोचक है घर में पहली लैट्रिन बनने की कहानी

भारत में शौचालय का इतिहास

भारत में शौचालय का इतिहास- आज भारत में शौच को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाई जा रही है. घर में अगर किसी व्यक्ति के शौच नहीं है तो वह काफी पिछड़ा हुआ माना जाता है. कोई व्यक्ति गरीब है तो उसके लिए पाखाना बनाने की व्यवस्था सरकार कर रही है. लेकिन किसी भी हालत में भारत सरकार भारत को खुले में शौच से मुक्त बनाना चाहती है.

यही कारण है कि आने वाले दिनों में भारत को शौच मुक्त बनाने के लिए आन्दोलन के रूप में कार्य होने वाले हैं. चलिए यह तो रही आज की बात लेकिन आपको पता है कि भारत में कभी भी घर में शौच नहीं होता था. पाखाना घर में होना बड़ा अशुभ बोला जाता था. तो अब दिमाग लगाइये कि आखिर भारत में लैट्रिन कहाँ से घरों में बनने लगी थी. आज हम आपको हम आपको भारत के अंदर लैट्रिन के आविष्कार के बारें में बताते हैं- भारत में शौचालय का इतिहास

भारत में शौचालय का इतिहास

मध्यकाल तक नहीं थे घरों में शौच 

आप किसी भी इतिहास को उठा लीजिये या फिर हिन्दू शास्त्रों को पढ़ लीजिये, आपको कहीं भी हिन्दुओं के समाज में घर के अंदर पाखाना होने की व्यवस्था का सबूत नहीं मिलेगा. दरअसल हिन्दू लोग मल आदि के लिए शुरू से ही खेतों का उपयोग करते थे.

सुबह का समय स्त्रियों के लिए होता था और सूरज के बाद पुरुष लोग खेतों में पल के लिय जाया करते थे. वहीँ ऐसा नहीं है कि कहीं भी हिन्दू या किसी भी खेत में हिन्दू मल करना शुरू कर देते थे. असल में एक जगह होती थी जिसको इसी काम के लिए उपयोग किया जाता था. बाद में इसको खाद के रूप में उपयोग किया जाता था.

भारत में शौचालय का इतिहास

किन्तु मध्यकाल में जब विदेशी मुस्लिम भारत आये तो 

अब इतिहास की सभी किताबें बताती हैं कि जब मुस्लिम विदेशों से भारत आये तो उनको खुले में मल करना अच्छा नहीं लगा था. इसके यहाँ पर पहले से घरों में लैट्रिन की व्यवस्था होती थी. तब भारत के अंदर पहली लैट्रिन बनाई गयी. मुस्लिम घरों में बनाई गयी लैट्रिन को देखने दूर-दूर से लोग आते थे. इसके बाद भारत में घरों के अंदर महिलाओं के लिए शौच बने ताकि बाहरी लोग उनकी महिलाओं पर गंदी निगाह ना डालें.

वहीँ अंग्रेजी की पुस्तकें यह भी बताती हैं कि जब रोमन भारत में आये तो 2100 बीसी के आसपास वह टायलेट भारत में लाये थे. जबकि वह कुछ व्यवस्थित टायलेट लाये थे. घर में पाखाने तो मुस्लिम ही भारत में लाये हैं.

 

तो इस तरह से भारत में लैट्रिन का आविष्कार घरों हुआ और इसे आज भारत स्वीकार कर चुका है. आज हर व्यक्ति को यह बात मालूम होनी चाहिए कि बाहरी मुस्लिमों ने भारत को टायलेट जैसा आविष्कार तो दिया है.

 

यह भी जरुर पढ़ें- हिन्दू इतिहास की सबसे भयानक लड़ाई- जिसमें अकेले 1 हिन्दू योद्धा ने अरबी हमलावरों को गाजर-मूली की तरह काटा था

 

1 Comment

1 Comment

  1. SATENDRA singh

    November 15, 2017 at 1:29 pm

    Accha Aur kuch history ke bare me

Leave a Reply

Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More in