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झूठ है कि चेचक का टीका एक अंग्रेजी डॉक्टर ने बनाया है ! अंग्रेजों ने चुराया है भारतीय आयुर्वेद का आईडिया, पढ़िए झूठे हैं ‘अंग्रेजी वैज्ञानिक और डॉक्टर

झूठ है कि चेचक का टीका एक अंग्रेजी डॉक्टर ने बनाया है

चेचक एक घातक बीमारी है जो मानव में पाया जाता है. यह जब किसी व्यक्ति को होता है तो इसे ठीक होने में 15 से 20 दिन लग जाते हैं.लेकिन रोग के कारण पुरे शरीर पर दाग़ पड़ जाते हैं,जिसे ठीक होने में लगभग पाँच या छ: महीने लग जाता है.

यह ज्यादातर गर्मी के वजह से होता है.यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए तो रोग से पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाने की संभावना होती है.

झूठ है कि चेचक का टीका एक अंग्रेजी डॉक्टर ने बनाया है

अठारवीं सदी में चेचक से बचने के लिए भारत में टीका लगाने का प्रथा आरंभ हुआ. उसके बाद यह प्रथा अफगानिस्तान और तुर्किस्तान के रास्ते होते हुए इंग्लैंड पहुँची और इसे वेरियोलेशन का नाम दिया गया.

झूठ है कि चेचक का टीका एक अंग्रेजी डॉक्टर ने बनाया है

जब हम चेचक का टीका के बारे में बात करते हैं तो एडवर्ड जेनर का नाम सबसे प्रथम में आता है. कहा जाता है कि सन् 1802 में इस वैज्ञानिक ने चेचक का टीका खोज निकला था.

झूठ है कि चेचक का टीका एक अंग्रेजी डॉक्टर ने बनाया है

जबकि सच्चाई यह है कि भारत में यह चेचक का टीका तेरहवीं सदी में एक चरक आयुर्वेद ने इस बीमारी से बचने का उपाय ढूंढ निकाला था.

झूठ है कि चेचक का टीका एक अंग्रेजी डॉक्टर ने बनाया है

इस बात की व्याख्या भारत के स्वधर्म पुस्तक पढ़ने पर आपको मिल जाएगी. इस पुस्तक में धर्मपाल जी ने लिखा है कि तेरहवीं सदी में भारत के कई जगहों पर चेचक का टीका लगाया जा रहा था. यह उस वक्त की देशी प्रथा थी. जो देशी दवाओं से बनाया गया था.

भारत के चरक संहिता में ही इसका जिक्र किया गया है.लेकिन अंग्रेजों ने नीच हरकत करके इस बीमारी से निजात पाने का तरीका को भी हथिया लिया.

दरअसल इन्होंने सन् 1802 में अंग्रेजों ने इस टिके  को लगाने पर रोक लगा दी. जिससे यह बीमारी फैलने लगी. लेकिन चालाक अंग्रेजों ने इस दवा का खोज उन्होंने की है,यह सभी को विश्वास दिलाने लगे.

आज सबको यह लगता है कि अंग्रेजों ने इस चेचक जैसे बीमारी का टीका निर्माण किया है वह दरअसल उनकी नहीं बल्कि एक भारतीय द्वारा खोजी गई दवा है.

इस बात की पुष्टि खुद चरक संहिता देती है. इसी पुस्तक में यह भी लिखा गया है कि सन् 1798 में सर जेनर ने गाय के थन पर निकले चेचक के दानों से वैक्सीन बनाने की जब विधि ढूँढ़ी

तो अंग्रेजों को यह फूटी आंख न सुहाया और अपने लाभ के लिए भारत के देशी टीके पर रोक लगा दी थी.जिसके बाद लोग भारतीय देशी टीके को लगवाते नजर आ रहे थे तो वह उन्हें जेल में डाल देते थे.

तो आप देख सकते हैं कि किस तरह अंग्रेजों ने छोटी हरकत का सहारा लेते हुए यह बोला कि चेचक का टीका उन्होंने निर्माण किया है. जबकि हिंदुस्तान में देशी दवा से चेचक को ठीक करने के लिए टीका बनाया जा चुका था.

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