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कांग्रेस और जयगढ़ किले में मिले ख़ज़ाने की पूरी कहानी, कैसे रची गयी थी पूरे ख़ज़ाने को हड़पने की साज़िश

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इतिहास के किताब में अगर आप देखेंगे, तो आपको मालूम होगा कि हमारे भारत देश में ऐसे कई किले हैं जहां  राजा महाराजा ने खजाना छुपाय था. कहते हैं कि इतिहास के दिनों में राजा अपने हीरे जवाहरात को किले में छिपाया करते थे. आज ऐसे ही किले के बारे में बात करेंगे जिसकी कहानी आज भी रहस्यमय है.

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दरअसल हम बात कर रहे हैं जयगढ़ किले के खजाने का जिसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है. राजा अकबर के शासनकाल में लोगों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. राजा अकबर के वर्चस्व के दौर में कुछ प्रभावशाली मुस्लिम अकबर के क्रूरता भरी नीतियों के कारण उनके खिलाफ साजिश रचने लगे थे. जब यह बात अकबर को पता चली तो वह सबको मौत के घाट उतार कर अपने वफादार मानसिंह के साथ काबुल निकल पड़े. कुछ दिनों बाद अकबर ने मानसिंह को काबुल का गवर्नर बना दिया. कई सालों तक राज करने के बाद मानसिंह ने जयपुर शहर को स्थापित किया.

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अगर आप जयपुर जाएंगे तो आपको बहुत सारे किले देखने को मिलेंगे.लेकिन जयगढ़ किला अपने आप में एक कहानी है. जयपुर शहर के स्थापित हो जाने के बाद मानसिंह अकबर से छुपकर अपने हीरे जवाहरात और खजाना एक कुआं को खुदवाकर छिपाया.सालो बाद जब यह बात इंदिरा गांधी के कानों में पड़ी इमरजेंसी के दौरान उन्होंने 5 महीने तक वहां पर खुदाई करवाई.इसके साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार पुटू ने भी उस खजाने में पाकिस्तान का हिस्सा मांगा.

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जुल्फिकार ने इंदिरा गांधी को खत में साफ-साफ लिख कर भेजा कि विभाजन से पहले हर संपत्ति पर पाकिस्तान का बराबरी का हक होगा. लेकिन इंदिरा गांधी ने इस पत्र का कोई जवाब नहीं दिया. हालांकि इस वक्त सरकार ने कहा कि वहां से कोई खजाना नहीं मिला. लेकिन आज भी लोग यह सोचने पर मजबूर है कि आखिर क्यों इंदिरा गांधी ने 5 दिनों तक जयपुर और दिल्ली के हाईवे को बंद करवा कर रखा था? हालांकि यह अब तक यह मालूम नहीं हो पाया है कि आखिर उस किले में खजाना था भी या नहीं.

 

इतिहास के रहस्यमई चीजों को जाने के लिए पढ़ते रहिए डेली वायरल इन इंडिया.( जया कुमारी)

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