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इतिहास

किसी फिल्मी कहानी जैसा है कलिंगा का इतिहास, इस योद्धा लड़की के आगे हार गए थे सम्राट अशोका, लाखों को मारने के बाद भी नहीं जीत पाये कलिंगा

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भारत के इतिहास में ऐसे दर्दनाक युद्ध हुए हैं कि जिसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते. इनमें से कालिंग का एक बहुत अच्छा उदाहरण है. यह कितना कष्टदायक यह था कि इस युद्ध में लाखों लोगों की  जाने गई थी. लेकिन इस युद्ध के खत्म होने के बाद सम्राट अशोक का नया जीवन का निर्माण हुआ था.

युद्ध कब हुआ था

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कलिंग का युद्ध 261 से 262 ईसा पूर्व में सम्राट और कलिंग के राजा अनंत नाथन के बीच  भुवनेश्वर से 8 किलोमीटर दूर दक्षिण में दया नदी के किनारे हुआ था. युद्ध का कारण यह था कि अशोक सम्राट अपने राज्य के कार्य क्षेत्र को बढ़ाना चाहते थे इसलिए उन्होंने कालिंगा पर आक्रमण किया था. इस युद्ध ने अशोक के मन पर एक गहरा छाप छोड़ा था. लाखों लोगों का नरसिंहार देखने के बाद अशोका का मानव दिल पिघल गया हो. इस युद्ध को जीतना है इनका अहम मकसद था. कलिंगा जीतने के पश्चात उन्होंने बौद्ध धर्म धारण कर लिया.

कलिंगा का इतिहास

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1 दिन की बात है जब अशोक सम्राट उदास बैठे थे और यह सोच रहे थे कि आखिरकार कैसे कलिंगा पर जीत हासिल हो. तभी उनका एक सामूहिक उनके पास आता है और कहता है कि महाराजा अभी अभी सूचना मिली है कि कलिंगा का महाराजा की मौत हो गई है. यह सुनकर अशोक बहुत खुश होता है . लेकिन उसके सामने एक मुश्किल भी खड़ी होती है  और वह मुश्किल यह था कि कालिंगा का दरवाजा राजा के मरने के बावजूद खुला नहीं था.

इसलिए अशोक जी स्वयं से दरवाजे को खोलने का निश्चय करते हैं. जब वह दरवाजा खोलते हैं तो वह एक ऐसे दृश्य को देखकर के अंदर से हिल जाते हैं . वह देखते हैं कि कलिंगा की महारानी पद्मिनी सैनिक के भेष में महिलाओं के साथ विशाल झुंड में घोड़े पर सवार  मानव बदले आग लिए खड़ी हो. तभी थोड़ी देर में महारानी अपने साथियों से कहती है कि आज इन लोगों की वजह से हमारी पतियों की जान गई है आज इनका अंत करके हम अपना बदला ले पाएंगे.

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यह देख अशोका महारानी से पूछते हैं कि आप हमसे क्या चाहती हैं तभी महारानी गरज की बोलती है कि हम तुमसे युद्ध करना चाहते हैं‌. यह सुनकर अशोक सम्राट के पसीने छूट जाते हैं और वह महारानी को जवाब देते हैं कि महारानी हम महिलाओं के साथ युद्ध नहीं कर सकते, यह उनके लिए सरासर अन्याय होगा. तभी महारानी गुस्से से उन्हें जवाब देती है कि लाखों लोगों का नरसंहार करके हमें हमारे पतियों से अलग किया क्या यह न्याय था.

यह सारे शब्द सुनकर अशोक  को अंदर से हिला कर रख दिया अंततः उनको अपनी गलती का एहसास हुआ और महारानी के सामने अपना शस्त्र त्यागते हुए हुए कहा ‘महारानी मैं आपसे क्षमा मांगता हूं और मैं आज से यह निश्चय करता हूं मैं किसी की भी जान नहीं लूंगा’‌. इसके बाद अशोक सब कुछ छोड़ कर के बौद्ध धर्म अपना लिया.

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आखिरकार कलिंगा और महारानी के साथ इंसाफ हुआ. महारानी भले अपने पति को वापस नहीं ला सकी लेकिन उन्होंने उस इंसान को बदल दिया जिसने अपने  स्वार्थ के लिए लाखों लोगों का घर उजाड़ा हो. इतिहास वाकई महिला की शक्ति को दर्शाता है और यह बताता है कि महिला आज भी अगर कुछ करने की ठान ले तो वह उसे पूरा करने के लिए हर कुछ कर गुजरती है.

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