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महाभारत के युद्ध में मारे गये सैनिकों के शव के साथ हुआ था बहुत गन्दा काम, अंतिम दर्शन को तरस गये थे सैनिकों के परिजन

महाभारत

महाभारत के युद्ध में जो जीता और जो जिन्दा बच गया है उसने तो इतिहास लिख लिया है लेकिन जो हारे और और जिन्दा ही नहीं बचे हैं उनका क्या हुआ इस बारें में कई बार अनाप-शनाप लिखा गया है. इतिहास में ऐसा जिक्र कहीं नहीं है कि महाभारत में मारे गये सैनिकों को कहीं इतिहास में सम्मान दिया गया या शहीद के रूप में मानकर इसका सम्मान किया गया था.

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कई बार तो सोचकर ऐसा लगता है कि वो लाखों सैनिक जो महाभारत में मारे गये थे उनके साथ आखिर क्या हुआ होगा. अगर कुरुक्षेत्र में लाखों लोग मारे गये थे तो उनके शरीर या अवशेष कुछ तो बचा होना चाहिए था. लेकिन वहां ऐसा कुछ भी इतिहासकारों को नहीं मिला है. तो आइये आपको बताते हैं कि उन लाखों सैनिकों के शव के साथ आखिर क्या हुआ जो महाभारत के युद्ध में मारे गये थे- महाभारत

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इतिहासकार अमल नन्दन लिखते हैं कि

इतिहासकार अमल नन्दन जिन्होनें कुरुक्षेत्र के पौराणिक इतिहास और महाभारत का पूरा अध्ययन किया है इनका खुद बोलना है कि जब युद्ध में भीष्म पितामह ने अंतिम सांस ली थी तो उसके बाद ही कुरुक्षेत्र की पूरी जमीन जहाँ युद्ध हुआ था उसको जला दिया गया था.

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दरअसल ऐसा हो सकता है कि उस जमीन को उस समय जलाया नहीं जाता तो वहां के हालात काफी गंदे होते. उस जमीन को जलाने के अलावा और कोई चारा उस समय के लोगों के पास था भी नहीं. ऐसा नहीं है कि कृष्ण जो उस समय पांडवों के मुख्य सलाहकार थे उनको युद्ध में मारे गये योद्धाओं के साथ हमदर्दी ना हो. लेकिन लाखों लोगों के शव ऐसे ही बिखरे होने की वजह से महामारी होने का भी खतरा था.

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वहीँ अधिकतर सैनिक तो हिन्दू ही थे. इसलिए उस जमीन को जलाना ही एक मात्र विकल्प था और कुरुक्षेत्र की सारी जमीन को भीष्म पितामह की अंतिम सांस के साथ ही जला दिया गया था और तब युद्ध में मारे गये सैनिकों के शव उनके परिजनों तक भेजना भी संभव नहीं था इसलिए महाभारत के युद्ध में मारे गये सैनिकों के शवों के अंतिम दर्शन इनके परिजन नहीं कर पाए थे.

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