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इतिहास

प्राचीन समय में इन 5 दर्दनाक तरीकों से दी जाती थी सजा, नंबर 3 है इतनी भयानक की आपकी रुंह कांप जाएगी

प्राचीन समय में सजा देने के दर्दनाक तरीके

प्राचीन समय में सजा देने के दर्दनाक तरीके- आज दुनिया में अपराध इतना बढ़ गया है कि ऐसा लगता है कि अपराधियों को कानून का कोई डर ही नहीं है. वहीं एक समय था जब जुर्म की इतनी भयानक सजा मिलती थी जिसे सुन कर ही अपराधियों की हालत खराब हो जाती थी. बीते जमाने में एक से बढ़कर एक क्रूर, निर्दयी शासक हुए हैं जिन्होंने सजा के लिए दर्दनाक और डरावनी तकनीक का उपयोग किया.

हम आपको ऐसी ही तकनीक के बारे में बता रहे हैं जो दर्दभरी और भयानक तो हैं लेकिन ऐसे ही तरीकों से जुर्म करने वाले लोगों को सजा दी जाती थी- प्राचीन समय में सजा देने के दर्दनाक तरीके

प्राचीन समय में सजा देने के दर्दनाक तरीके

फांसी, टुकड़ा और घोड़ा

1814 में इंग्लैंड में जब किसी व्यक्ति को मौत की सजा देनी होती थी तो सबसे पहले फांसी दी जाती थी. उसके बाद उसे लकड़ी के टुकड़े पर लेटा कर उलके हाथ और पैर घोड़ों से बांध दिया जाता था. जिसके बाद उसके शरीर के चार टुकड़े कर के घोड़ों को दौड़ा दिया जाता था.

प्राचीन समय में सजा देने के दर्दनाक तरीके

दो भागों में चीर देना

इस तकनीक का इस्तेमाल व्यक्ति को मौत के आखरी सांसों तक किया जाता है. इसमें व्यक्ति को जबतक उल्टा लटकाया जाता है जबतक कि उसके शरीर का सारा खून सर सहित शरीर के सबसे नीचे न आ जाए. उसके बाद उसे बीच से चीर दिया जाता था.

प्राचीन समय में सजा देने के दर्दनाक तरीके

ब्रेस्ट रिपर

पुराने समय में खासकर महिलाओं को सजा देने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें महिलाओं के ब्रेस्ट को इस नोकीले रॉड में फंसाकर लटका दिया जाता था.

प्राचीन समय में सजा देने के दर्दनाक तरीके

सीमेंट के जूते

इस तकनीक का उपयोग अमेरिकी माफिया करता था. इस तकनीक में सजा देने के लिए व्यक्ति को सीमेंट का एक जूता पहनाकर समुद्र में डाल दिया जाता था. सीमेंट इतना हेवी होता था कि वह समुन्द्र में नीचे चला जाता था.

प्राचीन समय में सजा देने के दर्दनाक तरीके

कीलदार कुर्सी

इस कुर्सी का उपयोग युरोप में 18वीं शताब्दी तक किया जाता था. इस कुर्सी में हर जगह कीलें होती थी. इसपर व्यक्ति को बांध दिया जाता था. इस कुर्सी को गर्म भी किया जाता था.

 

ये वो पांच तकनीक है जिसे देखकर आपकी रुह कांप जाएगी. पुराने समय में इसलिए तो जल्दी किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि वो शासक के विरुध खड़ा हो सके. इसके अलावा उस समय छोटी सी अपराध के लिए भी भयानक सजा दी जाती थी.

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