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रहस्य

जानिए क्यों आज तक कोई नहीं चढ़ पाया कैलाश पर्वत? अनसुलझे हैं कई रहस्य | Mount kailash Mystery

kailash-parvat

कैलाश पर्वत के अनसुलझे रहस्‍य (Mystery of kailash mountain in hindi)- कैलाश पर्वत एक पवित्र पर्वत स्थल है. हिंदू ग्रंथ के अनुसार यहां भगवान शिव का वास है. इस पर्वत से कई महत्वपूर्ण नदियां निकलती है जैसे सिंधु, ब्रह्मापुत्र, सतलुज इत्यादि. मान्यता है कि यहां पर भगवान शिव मां पार्वती और अपने वाहन नंदी के साथ गहरी तपस्या में लीन रहते हैं. बौद्ध और जैन धर्म के अनुसार यहां पर उनके धर्म के प्रचारक ऋषभ ने शिक्षा प्राप्त की थी.इस पर्वत में कई रहस्यमई चीज हुई है. जो बेहद दिलचस्प है. क्या आपको मालूम है कि इस पर्वतमाला की चढ़ाई कोई नहीं कर पाया है.

मृत्यु का स्थान कैलाश पर्वत, कैलाश पर्वत के रहस्य

आपको बता दें कि आज तक कोई भी इंसान कैलाश पर्वत नहीं चड़ पाया है.कोई भी नश्‍चर वस्‍तु कैलाश पर्वत के शिखर तक नहीं पहुंच सकती है. जिसने भी कैलाश पर्वत की चढ़ाई करने की कोशिश की उसको मृत्यु ही प्राप्त हुई है.

कैलाश पर्वत कहां पर है

चीन के अधिकृत क्षेत्र में है. जब भारत और चीन विवाद हुआ था तो उस समय हिन्दुओं का यह धार्मिक स्थान भारत के कब्जे से निकलकर चीन के पास चला गया था.

कैलाश पर्वत फोटो भी आप देखकर हैरान रह जाओगे, कई बार कैलाश पर्वत के फोटो में भी रहस्मयी चीजें नजर आई हैं. आइये आपको कैलाश पर्वत की तस्वीरें दिखाते हैं.

MOUNT-KAILASH

MOUNT-KAILASH

कैलाश पर्वत समय तेज गति से बढ़ता है

इस पर्वत में चढ़ने वाले लोगों ने जानकारी दी है कि यहां पर चढ़ाई करते वक्त समय बहुत तेजी से निकलता है. उसकी गति भापना बहुत मुश्किल है. समय की गति इतनी तेज होती है कि लोगों के बाल और नाखून तेज रफ्तार से बढ़ते हैं. कैलाश पर्वत के बारे में यह भी कहा जाता है कि यहां की हवाएं उम्र को बढ़ाती है.

KAILASH-MOUNT

KAILASH-MOUNT

स्थिति एक सा ना होना

तिब्‍बती बौद्ध भिक्षु मिलारेपा ही थे जो कैलाश पर्वत तक पहुंच पाए थे. जिसके बाद आज तक कोई व्यक्ति वहां तक पहुंचने में सफल नहीं हो पाया. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शिखर तक पहुंचते-पहुंचते कई बार मौसम बदलते रहता है. मौसम खराब और अन्य कारण की वजह से ट्रैकर्स वहां तक नहीं पहुंच पाते हैं.

PARVAT-KAILASH

PARVAT-KAILASH

धरती और स्‍वर्ग के बीच है गहरा संबंध

हिंदू जैन और बौद्ध धर्म के अनुसार ऐसा माना जाता है कि यह पर्वत स्वर्ग का पहला दरवाजा है. जो स्वर्ग की ओर लेकर जाता है. कहा जाता है कि पांडवों के साथ द्रौपदी को भी इस पर्वत की चढ़ाई करते वक्त मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. चढ़ाई करते वक्त सभी की मौत हो गई थी.

झीलों का अनोखा आकार

कैलाश पर्वत पर जो तिल है मानसरोवर और राक्षस. इन दोनों जिलों का आकार एक दूसरे से बिल्कुल अलग है. मानसरोवर झील गोल आकार का है वही राक्षस ताल अर्धचंद्र आकार की बनी है. ऐसा माना जाता है कि यह दोनों झीले सकारात्मक और नकारात्मक उर्जाओं को दर्शाती है. दिलचस्प बात तो यह है कि एक ही जगह में दोनों झील होते हुए दोनों का पानी एक दूसरे से अलग है. मानसरोवर झील का पानी मीठा होता है लेकिन राक्षस का पानी नमकीन पाया जाता है.

प्राकृतिक की देन

रूस के शोधकर्ताओं का कहना है कि कैलाश पर्वत नहीं है बल्कि यह प्रकृति के एक रहस्यमई घटना है. पर्वत कैथेडरल आकार में है जो कि देखने में पिरामिड जैसा महसूस होता है.

 

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