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इतिहास

पंडित नेहरु पर है इस बड़े नेता की मौत का है संगीन आरोप, रहस्य बनी हुई है यह मौत

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मौत

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने देश के लिए बहुत अहम योगदान दिया. आज भारत की सवैंधानिक व्यवस्था जैसा भी है वह उन्हीं के देन है. इसे बेशक तैयार डॉ. बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने किया हो लेकिन पूरे संविधान पर नेहरु की छाप भी है. देश के आजादी से लेकर उसे पटरी पर लाने तक उन्होंने बहुत बड़ी भूमिका निभाई.

देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल के साथ मिलकर उन्होंने देश को एक करने में भी अपनी पूरी जान फूंक दी लेकिन इस दौरान उन्होने एक गलती कर दी थी जिस कारण आज भी उनपर देश के बड़े नेता की मौत का जिम्मेदार ठहराया जाता है. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मौत

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मौत

कोलकाता के शिक्षित परिवार में जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे नेताओं थे जिन्होंने राजनीति को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें देश में अलख जगाने की जरुरत महसूस हुई. उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदू वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिए बहुत से प्रयास किए.

आज देश की सबसे बड़ी रजनीतिक पार्टी भाजपा को देख रहे हैं उसका जन्म जिस जनसंघ से हुआ वह मुखर्जी की ही देन है. मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक है.

श्यामा प्रसाद देश के लिए मौत को भी लगे लगाने से पीछे नहीं हटे. कश्मीर को जब विशेष राज्य का दर्जा दिया गया तब इसका पूरे देश में पुरजोर विरोध हुआ. पंडित दीनदयाल के नेतृत्व में देशभर से लोग इसके विरोध में इकट्ठा होने लगे तो मुखर्जी भी दिल्ली पहुच गए. दरियागंज में लम्बे समय तक इसका विरोध हुआ बाद में मुखर्जी इसके विरोध में जम्मू कश्मीर चले गए. इनके इस कदम का नतीज यह हुआ कि देशभर से इसके विरोधी कश्मीर जाने लगे.

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मौत

इस समय कश्मीर में अन्य भारत से जान एवाले लोगों को अलग से परमिट भी लेना पड़ता था. मुखर्जी को यह बात बिलकुल पसंद नहीं थी कि कश्मीर भारत का हिस्सा है तो क्यों हम अलग से परमिट लें. इस बात का विरोध श्यामाप्रसाद मुखर्जी बड़े जोरों से कर रहे थे.

11 मई 1953 को उन्हें नहीं पता था कि वो जिस राह पर चल रहे हैं उसपर उनकी जिंदगी की कुछ सांसे ही चल रही है. इस दिन उन्हें कश्मीर में अवैध रुप से आने के कारण गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

मुखर्जी की जेल में ही मृत्यु हो गई. किन परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हुई वो अभी तक राज है. पर उनके आंदोलन में शामिल रहे उनके करीबी दोस्त डॉ. परसादीलाल कश्यप ने इसके लिए तत्कालान प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला को जिम्मेदार ठहराया है.

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मौत

कश्यप ने कई बार यह आरोप मीडिया से बात करते हुए भी लगाया है. उनका साफ कहना है कि नेहरु इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है. सरकार ने उनकी मृत्यु से संबंधित राज को हमेशा के लिए राज ही रहने दिया इसलिए इसपर सवाल और गहरे हो जाते हैं.

सच बेशक कोई भी हो लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जाना भारतीय समाज के लिए बड़ी क्षति के रूप में सामने आया और कुछ मुद्दे जिनका हल श्यामाप्रसाद उस समय निकला सकते थे वह जस के तस आज भी खड़े हुए हैं.

 

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