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भगवान बुद्ध के कहने पर इनका एक शिष्य रहा था 4 महीने अकेले वैश्या के साथ, पढ़िए लौटकर आया तो वह कैसा हो गया था

गौतम बुद्ध और आमप्राली की कहानी

गौतम बुद्ध और आमप्राली की कहानी- कहानियां सिर्फ पढ़ने और मनोरंजन के लिए नहीं होती हैं. हर रोज की मार-काट और गला फोड़ खबरों से हम इतने पक रहे हैं कि कुछ अच्छा पढ़कर हमको ऐसा लगता है कि जैसे अमृत का पान कर लिया हो. डेमोक्रेटिक वायस ऑफ़ इंडिया की अब ऐसी कोशिश रहने वाली है कि हम आपके लिए खबरों से अलग कुछ शानदार और रोचक चीजें हर रोज आपके सामने परोसें.

आज हम आपको भगवान गौतम बुद्ध के उस शिष्य की कहानी को बताने वाले हैं जिसको पढ़कर आपको परम सत्य की प्राप्ति हो जाएगी. बुद्ध शुरू से ही स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति रहे. बुद्ध ने हमेशा यही कोशिश की ठिऊ कि व्यक्ति को भगवान के लायक बनाया जाए. व्यक्ति की आखरी से आखरी इच्छा को पूरा किया जाए. ऐसी ही एक कहानी है, जब गौतम बुद्ध अपने कई शिष्यों के साथ वैशाली नगर में पहुचे थे. गौतम बुद्ध और आमप्राली की कहानी

गौतम बुद्ध और आमप्राली की कहानी

बरसात के मात्र कुछ दिन पूर्व गौतम यहाँ आये थे. सभी को मालूम था कि बरसात के 4 महीने है इसलिए बुद्ध को गौतम नगर में आवास की पूरी व्यवस्था कर दी गयी थी. इसी नगर में आम्रपाली भी रहती थी. आम्रपाली को भारत के इतिहास की सबसे सुन्दर स्त्री बताया गया है. कहते हैं कि इसकी सुन्दरता के कारण ही यह स्त्री कभी किसी की पत्नी नहीं बनी बल्कि इसको नगरवधु बनाया गया था. नगरवधु को वैश्या बोला जाता था.

गौतम बुद्ध और आमप्राली की कहानी

एक दिन बुद्ध का भिक्षुक भीक्षा लेने आम्रपाली के महल पर पहुच जाता है. आम्रपाली इस साधू पर आकर्षित हो जाती है. पहली बार वह किसी पुरुष के प्रति आकर्षित थी. इतना शांत चेहरा और नम्र व्यवहार. वह भिक्षुक को अपने महल में बरसात के 4 महीने रहने को बोलती है, तब भिक्षुक बोलता है कि वह अपने गुरु से अनुमति लेगा.

गौतम बुद्ध और आमप्राली की कहानी

अब ऐसे में जो भिक्षुक के साथी थे वह यह कहानी सुनकर काफी जलने लगते हैं. वह पहले भी बुद्ध को सारी बात बढ़ा-चढ़ाकर बता देते हैं. जब वह शिष्य बुद्ध से मिलता है तो नगरवधू आम्रपाली के प्रस्ताव के बारें में बुद्ध को बताता है. बुद्ध शिष्य की आँखों में देख अनुमति दे देते हैं.

गौतम बुद्ध और आमप्राली की कहानी

बुध के दूसरे शिष्य हैरान हो जाते हैं. बुद्ध सभी को 4 महीने इन्तजार करने की सलाह देते हैं. 4 महीने बाद जब भिक्षुक वापस बुद्ध के आस आता है तो सभी देखते हैं कि नगरवधु आम्रपाली भी साथ आई है. आम्रपाली बुद्ध से शिक्षा मांगती है और कहती है कि वाकई आपकी शिक्षा में काफी दम है. आपकी शिक्षा धैर्य और संयम सिखाती है. आपके इस शिष्य ने साबित किया है कि आप सच्चे गुरु हैं और तब आम्रपाली भी महल और दौलत को दान करके बुद्ध की भिक्षुक बन जाती है.

गौतम बुद्ध और आमप्राली की कहानी

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