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सनातन धर्म

आज भी आग जैसा खौलता रहता है इस नदी का पानी, जहां भगवान शिव ने खोली थी गुस्से में अपनी तीसरी आँख

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देवों के देव महादेव भगवान शिव जी को कहा जाता है. भगवान शिव जी को भोले शंकर और नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है. अक्सर भगवान शिव जी को खुश करने के लिए हर कोई जुटे रहते हैं. ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव जी एक बार जब प्रसन्न हो जाए तो वह आपकी सारी इच्छाएं पूरी करते हैं. शिव जी को शांत स्वभाव में ज्यादा अच्छा लगता हैं.लेकिन एक बार अगर उनको गुस्सा आ गया तो सृष्टि का विनाश होने से कोई नहीं बचा सकता.

आपने सुना होगा कि शिवजी  गुस्से में अपनी तीसरी आंख खोल देते हैं. धार्मिक ग्रंथों में यह कम देखने को मिला है कि शिव जी ने तीसरी आंख खोली थी. लेकिन एक जगह है जहां शिव जी ने अपनी तीसरी आंख खोली थी. जिसके वजह से आज भी वहां का पानी खौलता है. बता दें महादेव ने अपनी तीसरी आंख हिमाचल प्रदेश में खोला था. हिमाचल प्रदेश के मणिकर्ण नाम का एक स्थान है जहां पर शिवजी को गुस्सा आया था. गुस्से से भगवान शिव ने अपने तीसरे नेत्र को खोल दिया था. इस तथ्य के पीछे एक रोचक कहानी जुड़ी है. आइए जानते हैं –

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ऐसा माना जाता है कि मां पार्वती के कान के आभूषण क्रीड़ा करते समय पानी में गिर गया था.वह आभूषण पानी में बहता चला गया.बहते-बहते वो आभूषण पाताल लोक में पहुंच गया. माता पार्वती को वह आभूषण किसी भी हालत में चाहिए था. जिसकी वजह से महादेव ने अपने सेवकों को निर्देश दिया कि वह आभूषण किसी भी कीमत में ढूंढ कर लाएं. सेवकों ने हर जगह उसे ढूंढा लेकिन उन्हें नहीं मिला.आभूषण ना मिलने के कारण माता पार्वती रूठ गई. माता पार्वती को ऐसा देख महादेव को गुस्सा आ गया. गुस्से में महादेव ने अपनी तीसरी आंख खोल दी. फिर नैना देवी देव महादेव की मदद की. नैना देवी डे पाताल लोक जाकर शेषनाग और माता पार्वती का आभूषण लौट आने को कहा.

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शेषनाग में खुशी खुशी महादेव को वह आभूषण उपहार के रूप में दे दिया. नैना देवी ने महादेव की जिस वजह से उस स्थान को नैना देवी बोला जाता है. हिमाचल के कुल्लू से 45 किलोमीटर दूर मणिकर्ण में स्थित है. किसी स्थान पर एक तरफ हिंदू मंदिर है और दूसरी ओर गुरु नानक देव का ऐतिहासिक गुरुद्वारा. जिसके चलते हिंदू और सिख समुदाय के लोग यहां अक्सर आते हैं. लाखों की संख्या में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती है. ऐसा माना जाता है कि देव ने अपनी तीसरी आंख यहां खोली थी जिसके कारण वहां का पानी हमेशा गर्म रहता है.पूरे साल में कितनी सर्दी क्यों ना पड़े लेकिन यहां का पानी आपको गर्म ही मिलेगा. ऐसा कहा जाता है कि इस पानी से स्नान करने से शरीर के सारे रोग और दुख दूर हो जाते हैं.

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ऐसी है कुछ कथा महादेव की तीसरी आंख पर. जो महादेव के गुस्से के बारे में बताती है. जो यह संकेत करती है कि भले ही महादेव शांत स्वभाव के हो लेकिन एक बार अगर उन्हें गुस्सा आ जाए तो उस पर खुद महादेव का नियंत्रण नहीं कर पाते. आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं और आगे भी ऐसी रोचक बातें जाने के लिए डेमोक्रेटिक वॉइस आफ इंडिया पढ़ते रहें. (जया कुमारी)

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