माँ शैलपुत्री की पूजा और मंत्र जिसका जाप करने से आपका दिन बन जायेगा
Connect with us
https://www.dvinews.com/wp-content/uploads/2019/04/vote.jpg

सनातन धर्म

पहला नवरात्र : माँ शैलपुत्री की पूजा और मंत्र जिसका जाप करने से आपका दिन बन जायेगा

Published

on

shailputri-mata

माँ दुर्गा के शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक मनाये जाते हैं। नवरात्रों  में 9 दिनों में देवी दुर्गा के नौ अलगअलग स्वरूपों की पूजा की जाती हैं.जिसमे की सबसे पहले नवरात्र को माँ शैलपुत्री की रूप में अपने भक्तों को दर्शन देती हैं.पर्वतराज हिमालय के घर कन्या ने जन्म लिया जिसका नाम शैलपुत्री रखा गया । आइए अब आपको बताये माँ शैलपुत्री की व्रत कथा क्या है और शैलपुत्री माँ का मन्त्र और कवच क्या है-

 

माँ शैलपुत्री की व्रत कथा  

माँ शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का पुष्प लिए अपने वाहन वृषभ पर विराजमान होतीं हैं. माँ शैलपुत्री को अन्य नामों से भी जाना जाता हैं जैसे की हेमावती,पार्वती और सती । शैलपुत्री के रूप में जन्म लेने से पूर्व इनका जन्म प्रजापति दक्ष की पुत्री सती के रूप में हुआ। भगवान् शिव से सती का विवाह संपन्न हुआ.एक बार की बात हैं राजा प्रजापति दक्ष ने अपने यहाँ बहुत बड़े स्तर पर यज्ञ  किया।सभी देवी-देवताओं सहित साधु संतों कोअपना अपना यज्ञ भाग लेने के लिए निमंत्रण भेजें गए। लेकिन भगवान शिव और दक्ष पुत्री सती को निमंत्रण नहीं दिया गया.यज्ञ वाले दिन जब सती को इस बात का मालूम हुआ की उनके पिता यज्ञ कर रहे हैं तब सती ने भगवान शिव से साथ चलने का आग्रह किया किन्तु भगवान शिव ने सती को समझाया की बिना किसी निमंत्रण के वहां जाना उचित नहीं होगा परन्तु सती का मन माता बहनों से मिलने को व्याकुल हो उठा.सती  ने भगवान शिव की बात को अनदेखा किया और जा पहुंची राजा प्रजापति दक्ष के यज्ञ में.वहां पहुंच कर सती को सिर्फ निराशा ही मिली | उन्होंने देखा की कोई भी उनके आने से खुश नहीं हैं जिस आदर और सम्मान की उम्मीदें बांधे वो आयी थी ऐसा कुछ था ही नहीं वहां। इसके विपरीत सभी ने उनका और पति शिव का निरादर ही किया। अपने परिवार जनो के कटु वचन सती सह नहीं पायी तभी यज्ञ कुंड में ही सती ने योगाग्रि में खुद को भस्म कर दिया।

तब अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मी शैलपुत्री। शैलपुत्री का विवाह भी शंकर जी से हुआ. माँ दुर्गा का यह स्वरुप अनंत शक्तियों से संपन्न हैं। ऐसा माना जाता हैं की सच्चे मन से कोई भी देवी इस स्वरुप की पूजा करें तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती हैं।

 

वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ ।

वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

मंत्र

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

Om Devi Shailaputryai Namah॥

 

Prarthana –

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

Vande Vanchhitalabhaya Chandrardhakritashekharam।

Vrisharudham Shuladharam Shailaputrim Yashasvinim॥

 

Stuti –

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

Ya Devi Sarvabhuteshu Maa Shailaputri Rupena Samsthita।

Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥

Dhyana –

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

पूणेन्दु निभाम् गौरी मूलाधार स्थिताम् प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्।

पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥

प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।

कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्॥

Vande Vanchhitalabhaya Chandrardhakritashekharam।

Vrisharudham Shuladharam Shailaputrim Yashasvinim॥

Punendu Nibham Gauri Muladhara Sthitam Prathama Durga Trinetram।

Patambara Paridhanam Ratnakirita Namalankara Bhushita॥

Praphulla Vandana Pallavadharam Kanta Kapolam Tugam Kucham।

Kamaniyam Lavanyam Snemukhi Kshinamadhyam Nitambanim॥

 

Stotra –

प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागरः तारणीम्।

धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

त्रिलोजननी त्वंहि परमानन्द प्रदीयमान्।

सौभाग्यरोग्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह विनाशिनीं।

मुक्ति भुक्ति दायिनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

Prathama Durga Tvamhi Bhavasagarah Taranim।

Dhana Aishwarya Dayini Shailaputri Pranamamyaham॥

Trilojanani Tvamhi Paramananda Pradiyaman।

Saubhagyarogya Dayini Shailaputri Pranamamyaham॥

Charachareshwari Tvamhi Mahamoha Vinashinim।

Mukti Bhukti Dayinim Shailaputri Pranamamyaham॥

 

Kavacha –

ॐकारः में शिरः पातु मूलाधार निवासिनी।

हींकारः पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥

श्रींकार पातु वदने लावण्या महेश्वरी।

हुंकार पातु हृदयम् तारिणी शक्ति स्वघृत।

फट्कार पातु सर्वाङ्गे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥

Omkarah Mein Shirah Patu Muladhara Nivasini।

Himkarah Patu Lalate Bijarupa Maheshwari॥

Shrimkara Patu Vadane Lavanya Maheshwari।

Humkara Patu Hridayam Tarini Shakti Swaghrita।

Phatkara Patu Sarvange Sarva Siddhi Phalaprada॥

 

Aarti –

शैलपुत्री माँ बैल असवार। करें देवता जय जय कार॥

शिव-शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी॥

पार्वती तू उमा कहलावें। जो तुझे सुमिरे सो सुख पावें॥

रिद्धि सिद्धि परवान करें तू। दया करें धनवान करें तू॥

सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने तेरी उतारी॥

उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो॥

घी का सुन्दर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के॥

श्रद्धा भाव से मन्त्र जपायें। प्रेम सहित फिर शीश झुकायें॥

जय गिरराज किशोरी अम्बे। शिव मुख चन्द्र चकोरी अम्बे॥

मनोकामना पूर्ण कर दो। चमन सदा सुख सम्पत्ति भर दो॥

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *