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इतिहास

भारत के बंटवारे की 10 दर्दनाक तस्वीरें, देखिये भारत को कितने दर्द से मिली थी 1947 में आजादी, तस्वीरें देखकर रो देंगे आप

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इतिहास के पन्नों को आप पलट कर देखेंगे तो बंटवारे का दर्दनाक तस्वीरें आपको जरूर देखने को मिलेगी. वह दिन 15 अगस्त 1947 का था जब भारत दो हिस्सों में बट गया. एक हिंदुस्तान बना तो दूसरा पाकिस्तान. उस दिन भले ही हमें आज़ादी मिली हो, लेकिन भारत की ताकत दो हिस्सों में बट गया. सही मायने में देखा जाए तो फिरंगीयों  की वह साजिश रंग लाई. इस विभाजन में कितने लोगों ने अपनी जान गवाई. कई लोगों ने अपना घर खोया, परिवार खोया. भारत के बंटवारे की ऐसी कई दर्दनाक तस्वीरें जिसे देख कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. तो चलिए देखते हैं भारत की वह 10 तस्वीरें जब भारत का बटवारा हो रहा था.

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कानूनी तौर पर भारत और पाकिस्तान 15 अगस्त 1947 की आधी रात को दोनों स्वतंत्र राष्ट्र बनें. जहां पाकिस्तान में स्वतंत्रता का झंडा 14 अगस्त 1947 में लहराया गया वहीं हिंदुस्तान में 15 अगस्त 1947 को. पाकिस्तान का सत्ता परिवर्तन की रेस में 14 अगस्त को कराची में रखी गई.ताकि आखरी ब्रिटिश वॉइसरॉय लुइस माउंटबैटन करांची और नई दिल्ली दोनों जगह की रस्मों में शामिल हो सकें.

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ब्रिटिश तो शुरू से ही छलिया और कपटी थे. व्यापार करने के बहाने फिरंगियों ने हिंदुस्तान पर कब्ज़ा कर लिया. अंतिम क्ष‌ण में भी हिंदुस्तान को छोड़ते वक्त ब्रिटिश ने  भारत से लाभ उठाने के लिए कई सारी योजनाएं बनाई और उसे लागू भी किया. वह इतने गिरे हुए थे कि जाते-जाते भी हिंदुस्तान से कई सारी चीजें का लाभ उठाना चाहते थे.

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फिरंगी ने जाने से पहले ही हिंदुओं और मुसलमानों के बीच फूट डाल दिया. जिसके कारण हिंदुस्तान को विभाजन का दर्दनाक हादसा सहना पड़ा. आपको बता दें विभाजन की इस योजना भारत को बहुत नुकसान हुआ और शायद ही इसका भरपाई कोई कर पाता.

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भारत के विभाजन से करोड़ों लोग प्रभावित हुए. इस विभाजन से अपने ही लोग अपनों से दूर हो ग‌ए.

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ब्रिटिश भारत छोड़ने से पहले हमारे साथ कई समझौते कि‌ए. समझौते के नाम पर इन्होंने हमसे कराएं जिसमें लिखा हुआ था कि उनके बनाए हुए स्मारक और मूर्तियों को हम किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाएंगे. जिसके वजह से आज भी हिंदुस्तान में ऐसी कई स्मारक और मूर्तियां अभी भी है जो ब्रिटिशों के द्वारा बनाई गई थी.

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बटवारे के समय हुए हिंसा में हुए हिंसा में करीब लोग 5 लाख लोग मारे गए वहीं 1.45 करोड़ लोगों ने अपना घर बार छोड़कर बहुमत संप्रदाय वाले देश में चले गए.

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आज भी यह सवाल का जवाब नहीं मिल पाया है कि आजादी के वजह से हमें का जहर क्यों पीना पड़ा?

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ऐसा क्या कारण था जिसके वजह से देश टुकड़ों में बट गया.

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विभजन के दौरान जिन्होंने अपना घर बार छोड़ा अपने परिवार से दूर चले गए उन्हें यह सवाल आज भी सताता है.

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यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात है कि देश का बंटवारा मजहब और धर्म के नाम पर हो गया. अगर इसके बारे में ध्यान पूर्वक सोचा जाए तो एक चीज मन में जरूर आएगा. आप यह जरूर समझ जाएंगे कि देश के राजनेता इतने स्वार्थी हो चुके थे कि अपने स्वार्थ के लिए आम आदमी का बंटवारा कर दिया.

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लेकिन आज भी यह बंटवारा नहीं थमा है. आज भी लोग जाति, धर्म और मजहब के नाम पर लड़ते रहते हैं. कोई कहता है मेरा धर्म सबसे ऊंचा है तो कोई कहता है मेरा मजहब सबसे ऊपर है. कोई यह क्यों नहीं कहता कि हम एक इंसान हैं और इंसानियत की राह पर हमें चलना चाहिए. यह जाति धर्म मजहब की चीजों से हम अपने आपको अपनों से ही दूर कर देते हैं. हमें यह क्यों नहीं समझते कि वह भी हमारी तरह एक इंसान है. कभी जाति धर्म को छोड़कर इंसान बन कर देखिए. आपको कितना सुकून मिलेगा वह आप सोच भी नहीं सकते.

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