अलाउद्दीन खिलजी की बेटी फिरोज़ा ने इस हिंदू राजा के प्यार में दी थी अपनी जान
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इतिहास

एक्सक्लूसिव स्टोरी- अलाउद्दीन खिलजी की बेटी फिरोज़ा ने इस हिंदू राजा के प्यार में दी थी अपनी जान, शादी नहीं हुई तो आत्महत्या कर ली थी फिरोजा ने

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अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास | Alauddin khilji history in hindi

अलाउद्दीन खिलजी हिस्ट्री- लव जिहाद की आपने एक से एक कहानियां सुनी होंगी. इन कहानियों में आपने एक लड़का देखा होगा जो कि मुस्लिम होता है और एक लड़की जो हिंदू होती है इसी तरीके की कहानियां लगातार बॉलीवुड पर हमारे सामने आती भी रहती हैं लेकिन भारतीय इतिहास में ऐसी भी कहानियां है जब किसी मुस्लिम राजा की बेटी को हिंदू राजा से प्यार हुआ और प्यार नहीं मिला तो उस लड़की ने आत्महत्या कर ली हो. इन कहानियों को इतना नीचे दबा के रखा गया है कि यह ऊपर नहीं आ पाई हैं.

अलाउद्दीन खिलजी तो आपने नाम सुना होगा. अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास बच्चे बच्चों को भारतीय किताबों में खूब पढ़ाया जाता है लेकिन यह बिल्कुल नहीं बताया जाता है कि अलाउद्दीन खिलजी की बेटी फिरोजा को हिंदू राजा से प्यार हुआ था और जब वह हिंदू राजा से शादी नहीं कर पाई थी तो उस राजा के लिए फिरोजा सती तक हो गई थी.  इस कहानी को हिंदू-मुस्लिम बोलकर इतिहास में दबा दिया गया. इतिहास लिखने वालों को ऐसा लगा कि शायद अगर यह कहानी किताबों में लिख देंगे और बच्चे को पढ़ लेंगे तो इस से मुस्लिम लोगों के प्रति हिंदू कट्टर हो जाएंगे लेकिन प्यार की एक कहानी नहीं छुपी और कुछ ऐतिहासिक किताबों में इस कहानी का जिक्र किया गया है. अलाउद्दीन खिलजी की बेटी वीरमदेव नाम के एक राजा से प्यार करती थी. खिलजी की बेटी ने अपनी जान इसलिए दी थी क्योंकि वह वीरमदेव से शादी करना चाहती थी. Alauddin khilji daughter firoza love story in hindi

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वीरमदेव और फिरोजा का प्यार

अलाउद्दीन खिलजी जब गुजरात में सोमनाथ मंदिर के शिवलिंग को खंडित क के वापस दिल्ली लौट रहे थे तो बीच में जालौर के शासक कान्हड़ देव चौहान ने शिवलिंग को प्राप्त करने के लिए इस सेना के ऊपर हमला किया था.  अलाउद्दीन खिलजी की सेना के ऊपर हमला हुआ और अलाउद्दीन की सेना जालौर में युद्ध हार गई थी. सोमनाथ मंदिर का शिवलिंग आज भी जालौर में स्थापित है. अलाउद्दीन खिलजी और जालौर के युद्ध के बारे में हम आपको कभी विस्तार से और बताएंगे.

अलाउद्दीन खिलजी को जब इस हार का पता चला तो उसने बदनामी से बचने के लिए इस युद्ध के मुख्य योद्धा वीरमदेव को दिल्ली बुलाया था. दिल्ली के अंदर जब अलाउद्दीन की बेटी फिरोजा वीरमदेव से मिली थी तो पहली नजर में ही इस वीरमदेव से फिरोजा को प्यार हो गया था. इसके बाद अलाउद्दीन ने अपनी बेटी का रिश्ता वीरमदेव से करने का प्रस्ताव इसी समय रख दिया था. जालौर लौटने पर वीरमदेव ने अलाउद्दीन खिलजी की बेटी से शादी करने से मना कर दिया था.

रावल वीरमदेव नाम लेखक देवेंद्र सिंह

आपको अगर लग रहा हूं कि यह इतिहास हम आपके सामने झूठा पेश कर रहे हैं तो उससे पहले आपको रावल वीरमदेव नाम की पुस्तक जरुर पढ़ लेनी चाहिए. इस पुस्तक के लेखक देवेंद्र सिंह है जिन्होंने इस प्रेम कहानी का जिक्र किया है. जब वीरमदेव ने अलाउद्दीन खिलजी की बेटी से शादी करने के लिए मना कर दिया तो उसके बाद अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर के ऊपर पांच बार बहुत बड़ा युद्ध किया था और पांचवी बार अलाउद्दीन खिलजी को हार का सामना करना पड़ा.

1368 में हुआ था वीरमदेव और अलाउद्दीन खिलजी का आखरी युद्ध

अलाउद्दीन खिलजी और जालौर के राजा वीरमदेव के बीच में आखिरी युद्ध की तारीख 1368 के आसपास की बताई जाती है. वीरमदेव के पिता कान्हड़ देव चौहान बेटे को सत्ता सौंपने के बाद आखिरी युद्ध लड़ते हुए मारे गए थे जिसके बाद वीरमदेव बड़ी बहादुरी से अलाउद्दीन की सेना से लड़ा और वह भी वीरगति को प्राप्त हो गया था. जब वीरमदेव की मृत्यु की खबर अलाउद्दीन खिलजी की बेटी फ़िरोजा को मिली तो उसने भी यमुना नदी में कूद कर अपनी जान दे दी थी.

फिरोजा और विरम देव की कहानी यहीं रुक गई लेकिन फिरोजा ने जिस तरीके से वीरमदेव से प्यार किया तो उससे साफ हो जाता है कि निश्चित रूप से फिरोजा वीरमदेव से काफी सच्चा प्यार करती थी. इस कहानी को इतिहासकारों ने कहीं भी नहीं लिखा है लेकिन देवेंद्र सिंह की पुस्तक रावल वीरमदेव में इस कहानी का जिक्र आपको मिल जरूर मिल जाएगा.

कहानी उन दो भगवा बाबाओं की जो 1857 की क्रांति के जनक रहे, मंगल पांडे के चाणक्य रहे और अंग्रेज इन बाबाओं को गिरफ्तार करने हिमालय तक चले गए थे

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