यह राजा नहीं होता तो भारत से भी बड़ा हिंदू राष्ट्र होता रुस, 1000 साल पहले रूस में थे सभी हिन्दू
Connect with us
https://www.dvinews.com/wp-content/uploads/2019/04/vote.jpg

इतिहास

1000 साल पहले रूस में थे सभी हिन्दू यह राजा नहीं होता तो भारत से भी बड़ा हिंदू राष्ट्र होता रुस

Published

on

रूस में हिन्दू धर्म

रूस में हिन्दू धर्म- हिंदू धर्म को सिंधु नदी से जोड़ा जाता है. दरअसल हिंदू कोई धर्म नहीं बल्कि सभ्यता है. भारत में जिसे हिंदू धर्म कहा जाता है वह वास्तव में सनातन धर्म है. हिंदू धर्म कहने के पीछे एक कारण यह भी है कि यह सनातन धर्म को अपनाने वाले, सिंधू नदी के आसपास यानि भारत तथा उसके आसपास रहने वाले लोग ही है. आपको यह जानकर हैरानी होगी जिस धर्म को हम भारत में मानते हैं वही धर्म कभी रुस में हुआ करता था.

लगभग 10वीं शताब्दी से पहले तक रुस में हिंदू धर्म ही प्रचलित था. लोग संगठित होकर वैदिक तरीके से पूजा करते थे. बाद में यहां पूजा करने वाले लोग असंगठित हो गए. माना जाता है कि यहां पुजारियों की मनमानी के कारण हिंदू धर्म असंगठित होता गया और बाद में हिंदू धर्म के खत्म होने का कारण बना. रूस में हिन्दू धर्म

रूस में हिन्दू धर्म

10वीं शताब्दी में रुस के कियेव रियासत के राजा व्लादीमिर ने देश में विभिन्न तरह के धर्मों का प्रचलन देख परेशान हो गए. वो चाहते थे लोग किसी एक धर्म को अपनाए. इसके लिए उन्होंने दो धर्म इसाई और इस्लाम की जानकारी इकट्ठा किया. उन्हें इस्लाम इसलिए पसंद नहीं आया क्योंकि उसमें ज्यादा पाबंदी थी जिसे उनकी जनता आसानी से अपना नहीं सकते थे इसलिए उन्होंने इसाई धर्म को देश के लिए चुना. इसाई धर्म में किसी तरह की पाबंदी नहीं थी.

राजा व्लादीमिर ने खुद इसाई धर्म अपनाकर जनता से भी इसी धर्म को अपनाने का आग्रह किया. इसके बाद से ही लोग राजा के आदेश को अपनाना शुरु कर दिया.

इसके बाद भी लम्बे समय तक वहां हिंदू धर्म के देवी देवताओं की पूजा होती गई लेकिन इसाई धर्म के प्रचार प्रसार के कारण हिंदू धीरे धीरे यहां से पूरी तरह समाप्त हो गया.

रूस में हिन्दू धर्म

रुस में हिंदू धर्म के बहुत से देवी देवाताओं की पूजा की जाती थी. रुस के लोग प्रकृति प्रेमी थे. वहां देवी देवाताओं के नाम अलग थे. वहां सूर्य वायु, अग्नि, पर्वत, पवित्र पेड़ों की पूजा की जाती थी. वहां वज्र देवता को बड़ा देवता माना जाता था. खास अवसर पर इनकी पूजा होती था. वहां वज्र देवता को पेरुन,  सूर्य देवता को होर्स या दाझबोग कहा जाता था.

रुस के राजा व्लादीमिर ने यह फैसला नहीं लिया होता तो आज हिंदू धर्म इतना विस्तार पा चुका होता कि वह विश्व में सबसे बड़े धर्म के रुप में देखा जाता. राजा की इच्छा और पुजारियों ने मनमानी ने इस वैदिक धर्म को रुस से समाप्त कर दिया. पुजारियों ने धर्म के प्रसार में थोड़ा भी काम किया होता तो आज वहां हिंदू धर्म होता. विश्व में सबसे बड़ा धर्म के रुप में आज पूरे विश्व में हिंदू धर्म को ख्याती प्राप्त होती लेकिन दुर्भाग्य से सबसे प्राचीन धर्म वहां से विलुप्त हो गया.

 

यह भी जरुर पढ़ें-

यहां इंसान नहीं जानवर को बनाया जाता है मेयर, कारण जानकर दंग रह जाएंगे आप

 

किस्सा गरुण पुराण का- बोले तो आत्मा मरने के बाद उस रात वापिस आती है घर वालों से मिलने

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *