subhash chandra bose in hindi | सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु का रहस्य
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इतिहास

पार्ट 1- एक रहस्मयी बाबा सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु की कहानी- नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मौत 1945 के विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस हमेशा जवाहरलाल नेहरू का इसलिए विरोध किया करते थे क्योंकि सुभाष जी हमेशा एक सही और सच्ची आजादी चाहते थे. सुभाष जी नहीं चाहते थे कि भारत को आजादी अंग्रेजों की शर्त पर मिले. यही कारण है कि जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के हित कई बार टकराते हुए भी नजर आए हैं.

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सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु का रहस्य

(subhash chandra bose in hindi) नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विमान दुर्घटना को लेकर कई तरीके की कहानियां आपने जरूर सुने होंगे कई अंग्रेज अधिकारी भी लगातार सुभाष चंद्र बोस की हत्या की पहेली को सुलझाने में अंतिम समय तक लगे रहे थे कुछ अंग्रेज अधिकारियों को शक था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की हत्या विमान दुर्घटना में बिल्कुल नहीं हुई है भारत को आजादी मिलने के पीछे कहीं ना कहीं एक बहुत बड़ा कारण नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी रहे थे.

सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु कैसे हुई थी |subhash chandra bose in hindi

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था. दूसरा विश्व युद्ध समाप्ति की कगार पर था. चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था और उस समय नेताजी सुभाष चंद्र बोस की उम्र कुछ 48 वर्ष की रही होगी. द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने से पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस को आखरी बार लोगों ने देखा था और जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत लौट रहे थे तो उस समय उनके विमान दुर्घटना की खबर सभी को मिली थी.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस

सुभाष चंद्र बोस विमान हादसा | subhash chandra bose death

लेकिन इसके बावजूद भी ऐसा बोला जाता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की यह आखिरी विमान यात्रा बिल्कुल भी नहीं थी. नेताजी सुभाष चंद्र बोस विमान दुर्घटना में मरे थे या नहीं यह पहेली बनकर रह गया है. जापान की सहायता से सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद सेना की स्थापना कर ली थी. 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु हमला हुआ तो उसके बाद नेताजी जापान में शरणागत रहे थे. नेताजी सुभाष चंद्र बोस हमेशा जवाहरलाल नेहरू का इसलिए विरोध किया करते थे क्योंकि सुभाष जी हमेशा एक सही और सच्ची आजादी चाहते थे. सुभाष जी नहीं चाहते थे कि भारत को आजादी अंग्रेजों की शर्त पर मिले. यही कारण है कि जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के हित कई बार टकराते हुए भी नजर आए हैं.

सुभाष चंद्र बोस की विमान दुर्घटना के बारे में बात करें तो इस तरीके की कई सारी बात सामने आती है जिससे यह साबित होता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस विमान दुर्घटना में नहीं मरे थे-

क्या मौनी बाबा ही सुभाष चंद्र बोस थे? | Gumnami baba death

नेताजी सुभाष चंद्र बोस

i) इस तरीके की कहानियां भी कई सारे सूत्रों से सुनने को मिलती हैं कि 1985 में रेडियो के ऊपर यह खबर सुनने को मिली थी कि अयोध्या में रहने वाले मौनी बाबा का की मौत हो गई है. इन मौनी बाबा को सुभाष चंद्र बोस बताया गया था.

ii) मौनी बाबा के पास जो सामान था वह सामान सुभाष चंद्र बोस का था. इसमें ऐसे कई सारे सबूत दे जिससे कि यह साबित हो सकता था कि सुभाष चंद्र बोस जी मौनी बाबा थे और वह लगातार आजादी के बाद भारत में रह रहे थे. अयोध्या में छुपकर मौनी बाबा रह रहे थे और साथ ही साथ देश के लिए पर्दे के पीछे से सुभाष चंद्र बोस काम भी कर रहे थे.

iii) किताबों में इस तरीके की बातें भी लिखी हुई है कि जब देश के प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री ताशकंद समझौता कर रहे थे तो उसके बाद आखिरी रात को वह सुभाष चंद्र बोस जी से मिले थे. सुभाष चंद्र बोस जी के लाल बहादुर शास्त्री ने पैर छुए थे. लाल बहादुर शास्त्री जी सुभाष चंद्र बोस का काफी सम्मान करते थे. देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति रहा हो जो सुभाष चंद्र बोस जी का सम्मान ना करें लेकिन लाल बहादुर शास्त्री हत्या भी उसी रात हो गई लाल बहादुर शास्त्री की हत्या के बारे में विस्तार से बतायेंगे। लेकिन ऐसा बोला जाता है कि लाल बहादुर शास्त्री जी सुभाष चंद्र बोस से मिले थे.

iv) लौटकर फिर से एक बार मौनी बाबा पर आते हैं. मौनी बाबा की हत्या के बाद जब यह खबर फैली की मौनी बाबा जी सुभाष चंद्र बोस थे तो पुलिस अयोध्या में गई थी. तब तक सरयू के किनारे सुभाष चंद्र बोस जी के शरीर को अग्नि के हवाले कर दिया गया था. बाद में मौनी बाबा और सुभाष चंद्र बोस जी के सत्य को जानने के लिए मुखर्जी आयोग भी बनाया गया था इस मुखर्जी आयोग को 2002 में बंद कर दिया गया. मुखर्जी आयोग को क्यों बंद किया गया इसके पीछे आज तक कोई भी सच सामने नहीं आया है.

v) सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु जब विमान दुर्घटना हुई तो उस समय एक आर्मी चीफ ने अपने अधिकारियों को यह लिख कर दिया था कि नेताजी विमान दुर्घटना से बचकर निकल गए हैं और यदि वह भारत वापस आ जाते हैं तब अंग्रेजों को भारत ही नहीं बल्कि एशिया गवाना पड़ सकता है. इसलिए लगातार अंग्रेज सुभाष चंद्र बोस को भारत छोड़ने से पहले खोजते रहे थे.

vi) भारत में जब वाजपेई जी की सरकार थी तो उस समय आजाद हिंद फौज के लोगों को सम्मान के लिए बुलाया गया था. इस दल में एक विदेशी व्यक्ति भी था जिसने की आजाद हिंद फौज की ड्रेस पहन रखी थी. इस व्यक्ति से लाल कृष्ण आडवाणी जी ने काफी बातें की थी और उनके कार्य करने की शैली को पता करने के लिए काफी बातचीत की लेकिन उस व्यक्ति ने ना तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद फौज की कार्यशैली पर कोई बात बोली थी और ना ही सुभाष चंद्र बोस जी विमान दुर्घटना पर बात की थी.

vii) रूस में 1947 के अंदर एक समाचार पत्र में यह खबर छापी थी कि सुभाष चंद्र बोस रूस में हैं और भारत को आजाद कराने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. जब जांच कमेटी रूस पहुंचीऔर उन दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए जिसके आधार पर यह बोला गया था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस रूस में हैं तो उस समय के समाचार पत्र के अधिकारियों ने जांच कमेटी के लोगों को यह बोला था कि हमारे ऑफिस में अचानक इस खबर के बाद आग लग गई जिसमें कि सारे सबूत नष्ट हो चुके हैं.

viii) बंगाल हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया था कि भारत सरकार यह बताएं कि नेता जी की मौत कब और कैसे हुई? इस सवाल का जवाब सरकार नहीं दे पाई है. सरकार के पास अभी तक इस बात के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है कि नेताजी की मौत विमान दुर्घटना में हुई थी.

ix) नेताजी का ड्राइवर और कैप्टन शाहनवाज खान ऐसे सबूत रहे हैं जो हमेशा इस बात पर जोर देते रहे कि नेताजी की मौत विमान दुर्घटना में बिल्कुल भी नहीं हुई है.

आज भी देश के सामने यह सवाल खड़ा हुआ है कि आजादी के इतने सालों बाद भी हम नहीं जानते हैं कि हमारे सबसे बड़े स्वतंत्रता सेनानी और देश के सबसे बड़े क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु कैसे हुई थी? इस सवाल को खोजने का काम आप जितना करेंगे तो आपको परत दर परत कई सारी पहेलियां मिलती जाएंगी लेकिन इस सच पर आप नहीं पहुंच पाएंगे, कि क्या सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई थी या फिर वह आजादी के बाद भारत में रहते हुए नजर आए हैं.

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