कभी सोचा है कि भारतीय तिरंगे के बीच बने अशोक चक्र का क्या महत्व है ?
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कभी सोचा है कि भारतीय तिरंगे के बीच बने अशोक चक्र का क्या महत्व है ?

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significance of Ashok chakra

हम लोगों ने भारतीय तिरंगे में एक चक्र तो देखा है जिसे अशोक चक्र कहा जाता है कि कभी गौर किया है कि आखिर इसका महत्व क्या है और इसमें ये 24 तीलियों का क्या महत्व है तो चलिए आज हम इसी पर आपको बताते है कुछ ख़ास रोचक और मजेदार जानकारी।

ये है अशोक चक्र और उनकी 24 तीलियों का महत्व

सबसे पहले तो आपको बता दें कि अशोक चक्र का अर्थ धर्म चक्र या ‘कानून का पहिया’ है अर्थात व्हील ऑफ़ लॉ। यह संस्कृत शब्द धर्म चक्र से लिया गया है, जिसका अर्थ है पहिया और इसमें 24 तीलियाँ हैं।

हिंदू धर्म के अनुसार, पुराणों में उल्लेख किया गया है कि 24 ऋषियों (प्रवक्ता) को गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों के माध्यम से दर्शाया गया है। इसमें मनुष्य के अविद्या से दु:ख बारह तीलियां और दु:ख से निर्वाण बारह तीलियां (बुद्धत्व अर्थात अरहंत) की अवस्थाओं की प्रतिक है। धर्मचक्र के 24 तीलियों को हिमालय के इन सभी 24 ऋषियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें विश्वामित्र पहले हैं और याज्ञवल्क्य अंतिम हैं जो धर्म को नियंत्रित करते हैं। अशोक चक्र धर्मचक्र का प्रतीक है और इसे सम चक्र के नाम से भी जाना जाता है।

ये है सभी 24 तीलियों के नाम

  1. प्यार
  2. साहस
  3. धैर्य
  4. शांति
  5. चुम्बकत्व
  6. अच्छाई
  7. आस्था
  8. सौम्यता
  9. निस्वार्थ भाव
  10. आत्म-नियंत्रण
  11. आत्म बलिदान
  12. सत्यता
  13. अधिकार
  14. न्याय
  15. दया
  16. अनुग्रह
  17. नम्रता
  18. सहानुभूति
  19. सहानुभूति
  20. .प्राकृतिक ज्ञान
  21. नैतिक मूल्य
  22. आध्यात्मिक ज्ञान
  23. ईश्वर का भय
  24. विश्वास या विश्वास या आशा

अशोक चक्र को भारत गणराज्य के राष्ट्रीय ध्वज के केंद्र में रखा गया है। यह 22 जुलाई, 1947 को अपनाया गया था। साथ ही आपको बता दें कि यह एक सफेद पृष्ठभूमि पर एक गहरे नीले रंग में रखा गया है। तो आशा करते है कि अब आपको पता चल गया होगा कि आखिर अशोक चक्र का क्या महत्व है और उनके बीच में बनी 24 तीलियों का क्या महत्व है।

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