फाँसी पर चढ़ाये जाने से पहले मंगल पांडे ने आखरी गोली किसको मारी थी?
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दोस्तों क्या आप जानते हो 1857 की क्रांति में फाँसी पर चढ़ाये जाने से पहले मंगल पांडे ने आखरी गोली किसको मारी थी?

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मंगल पांडे | 1857 की क्रांति

8 अप्रैल 1857 के दिन मंगल पांडे को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया था. 1857 की क्रांति भारतीय इतिहास में अंग्रेजो के खिलाफ पहली बगावत बोली जाती है. इस बगावत के बाद ही भारत को अचानक से ही आजादी की सनक उठी थी और यह सनक आगे चलकर अंग्रेजों को भारत से बाहर करने तक जारी रही थी. मंगल पांडे का जब भी भारतीय इतिहास में नाम आता है तो हम मंगल पांडे के बारे में इतना ही जान पाते हैं कि मंगल पांडे वही व्यक्ति रहे हैं जिनको 1857 की क्रांति का जनक बोला गया है.

‘स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ’ इस नाम से एक पुस्तक छपी है और इस पुस्तक में बताया गया है कि मंगल पांडे 1857 की क्रांति के पीछे पूर्ण रूप से नहीं थे. 1857 की क्रांति के जनक दयानंद सरस्वती थे यह पुस्तक में बताया है. दयानंद सरस्वती को मंगल पांडे अपना गुरु मानते थे और दयानंद सरस्वती ने 1857 की क्रांति के मुख्य मुद्दे कारतूस और मांस वाली बात को प्रचारित व प्रसारित किया था. चलिए यह पुरानी बात है और इस कहानी के  ऊपर हम पहले लिख चुके हैं, आप इस लिंक के द्वारा यह पढ़ सकते हैं-

कहानी उन दो भगवा बाबाओं की जो 1857 की क्रांति के जनक रहे, मंगल पांडे के चाणक्य रहे और अंग्रेज इन बाबाओं को गिरफ्तार करने हिमालय तक चले गए थे

1857 की क्रांति में मंगल पांडे ने आखरी गोली किसको मारी थी?

आज हम आपको बताने वाले हैं कि 8 अप्रैल 1857 के दिन मंगल पांडे को फांसी दी गई थी तो उससे पहले मंगल पांडे ने आखरी गोली किसको मारी थी. दरअसल 19 जुलाई 1827 को जन्मे मंगल पांडे ने फांसी से कई दिन पहले खुद की जान लेने की कोशिश की थी और इस कोशिश में वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे. 29 मार्च 1857 का दिन था. 34 बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के साथ बैरकपुर में तैनात सिपाहियों में इस बात की अफवाह फैली हुई थी कि सिपाहियों को इसाई बनाया जा रहा है. साथ ही साथ इस तरीके की बातें हो रही थी कि यूरोपीय सैनिक हिंदुस्तानी सैनिकों को मारने के लिए भारत आ रहे हैं.

इतिहासकार किम ए वैगनर ने अपनी क़िताब ‘द ग्रेट फियर ऑफ 1857 में इस बात का जिक्र किया है. 29 मार्च की घटना के ऊपर किम ए वैगनर लिखते हैं कि यह  दो और अफवाहों का दौर था और लगातार चारों तरफ अफवाह फैल रही थी. मंगल पांडे के पास भी इसी तरीके की आवाज आई थी कि या तो अंग्रेज सैनिकों को ईसाई बनाने वाले हैं या फिर यूरोपीय सैनिक भारतीय सैनिकों को मार देने वाले हैं. मंगल पांडे 29 मार्च की शाम 4:00 बजे अपने तंबू में बंदूक साफ कर रहे थे थोड़ी देर में उनको यूरोपी सैनिकों के बारे में पता चल जाता है. सिपाहियों के बीच बेचैनी बढ़ जाती है. मंगल पांडे को भी घबराहट होने लगती है. मंगल पांडे बैरक में से भाग कर बाहर ग्राउंड में आ जाते हैं.

मंगल पांडे ने उस समय क्वार्टर गार्ड बिल्डिंग के सामने घूमते हुए भारतीय सैनिकों को भड़काना शुरू कर दिया था. अंग्रेज अफसरों को इस बात की खबर पहुंच चुकी थी कि मंगल पांडे यूरोपीय सैनिकों की बात को लेकर भारतीय सैनिकों को भड़का रहे हैं. सार्जेंट मेजर जेम्सन मंगल पांडे के पास आते हैं और मंगल पांडे इस अंग्रेज मेजर के ऊपर गोली चला देते हैं लेकिन यह गोली सार्जेंट मेजर जेम्सन को नहीं लगती है, अंग्रेज अफसर भी गोली चला देता है और मंगल पांडे भी उस गोली से बच जाते हैं.

मंगल पांडे ने खुद को मारी थी गोली

लेकिन अब सवाल उठता है कि 1857 की क्रांति के नायक मंगल पांडे ने आखिरी गोली किसके ऊपर चलाई थी. अंग्रेज इतिहासकारों की किताब में इस बात का जिक्र है जिसमें इतिहासकार किम ए वैगनर  लिखते हैं कि अंत में मंगल पांडे ने अपनी बंदूक जमीन पर रखते हुए उसके ट्रिगर को पैर के अंगूठे से दबाते हुए अपने ऊपर ही गोली चलाई थी और मंगल पांडे इसके बाद घायल होकर जमीन पर गिर पड़े थे. अंग्रेज इतिहासकार मंगल पांडे के बारे में कितनी सच्चाई लिखते हैं इसके ऊपर हर किसी को शक है लेकिन अंग्रेजी इतिहासकार इस कहानी में यह बात भी जोड़ते हैं कि जब मंगल पांडे अंग्रेजों से लड़ रहे थे तो उस समय अपने साथियों को भी गाली देते हुए बोल रहे थे कि पहले तुम लोगों ने मुझे भड़का दिया और अब तुम लोग मेरे साथ नहीं आ रहे हो. दरअसल मंगल पांडे का साथ भारतीय सैनिकों ने भी नहीं दिया था मंगल पांडे चाहते थे कि अंग्रेजों का विरोध किया जाए लेकिन भारतीय सैनिकों ने मंगल पांडे का साथ इस लड़ाई में नहीं दिया था.